लखनऊ, संवाददाता https://dhadkannews.com : राजधानी लखनऊ में उस वक्त बवाल मच गया जब अधिवक्ताओं के चेंबरों पर बिना पूर्व सूचना बुलडोजर चलाए जाने का आरोप लगा। विरोध करने पहुंचे अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने से कई वकील घायल हो गए। घटना के बाद वकीलों में जबरदस्त आक्रोश है और इसे न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला बताया जा रहा है।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के उनके चेंबरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। जब वकीलों ने इसका विरोध किया तो पुलिस बल का प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया गया। इस कार्रवाई में कई अधिवक्ताओं को चोटें आई हैं। घटना के बाद बार एसोसिएशन और अधिवक्ता संगठनों ने इसे “लोकतंत्र और न्यायपालिका की गरिमा पर हमला” करार दिया है। अधिवक्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अब आर-पार की लड़ाई होगी और यदि प्रशासन ने कार्रवाई वापस नहीं ली तो विधानसभा घेराव किया जाएगा।
प्रदेशभर के बार संगठनों ने इस घटना के विरोध में कल उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में प्रदर्शन और न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का ऐलान किया है। वकीलों का कहना है कि सरकार यदि उनकी आवाज को लाठी के दम पर दबाने की कोशिश करेगी तो पूरा प्रदेश सड़कों पर उतरकर जवाब देगा।
अब सबकी नजर सरकार और प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या न्याय मांगने वालों पर लाठी चलाना ही अब शासन की नई नीति बन चुकी है?



