गुरुग्राम, https://dhadkannews.com : कुछ घंटों की बारिश… और करोड़ों रुपये के विकास के दावे पानी में बह गए। देश की सबसे महंगी रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट राजधानी माने जाने वाले गुरुग्राम की असल तस्वीर मंगलवार को पहली ही मूसलाधार बारिश ने दुनिया के सामने ला दी।
सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब दिल्ली-जयपुर को जोड़ने वाले NH-48 पर सनबीम कंपनी के पास सड़क का हिस्सा धंस गया। इसके बाद इफको चौक से नरसिंहपुर तक करीब 8 से 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हजारों लोग घंटों तक गाड़ियों में कैद रहे, एंबुलेंस तक जाम में फंसी रहीं और ऑफिस से घर लौटने वाले लोग बेबस नजर आए। विडंबना देखिए… हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम और जलभराव रोकने के दावे किए जाते हैं। लेकिन पहली ही तेज बारिश ने उन दावों की परतें उधेड़ दीं। गुरुग्राम के डीसी और हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के आवास के बाहर तक सड़कें तालाब बन गईं और कई वाहन गड्ढों में धंस गए। सवाल उठता है—जब वीआईपी इलाकों का यह हाल है, तो आम नागरिकों की सुनवाई कौन करेगा?
हीरो होंडा चौक, इफको चौक, सिकंदरपुर, मानेसर रोड, गोल्फ कोर्स रोड, पटौदी रोड, खांडसा रोड, राजेंद्र पार्क, बजघेरा, धनवापुर, कार्टरपुरी और ओल्ड गुरुग्राम समेत शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा रहा। साइबर सिटी की चमक बारिश के पानी में बहती दिखाई दी।
हालात इतने बिगड़े कि ट्रैफिक पुलिस को आपात रूट डायवर्जन जारी करना पड़ा। लोगों से NH-48 छोड़कर एसपीआर और द्वारका एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने की अपील की गई। यानी जिस हाईवे को देश की आर्थिक धड़कन कहा जाता है, वही कुछ घंटों की बारिश में ठप पड़ गया। चौंकाने वाली बात यह भी रही कि मूसलाधार बारिश के बाद भी गुरुग्राम की हवा साफ नहीं हुई। शहर का AQI 207 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में रहा। यानी लोग एक तरफ जलभराव और जाम से जूझते रहे, दूसरी तरफ प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हर साल मानसून आने से पहले किए जाने वाले करोड़ों रुपये के दावे सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं? अगर पहली ही बारिश में गुरुग्राम की रफ्तार थम जाती है, सड़कें धंस जाती हैं और पूरा शहर जाम में डूब जाता है, तो पूरे मानसून में हालात कितने भयावह होंगे?



