Sunday, July 5, 2026
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WhatsApp यूजर्स ALERT! इस नए फीचर पर सरकार ने लगाई रोक, जानिए क्यों मचा बवाल

नई दिल्ली, https://dhadkannews.com  : WhatsApp के बहुप्रतीक्षित Username फीचर पर भारत सरकार ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर साइबर सुरक्षा और फर्जी पहचान (Impersonation) की आशंकाएं जताते हुए Meta को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि जब तक सरकार संतुष्ट नहीं होती, तब तक भारत में इस फीचर को लागू न किया जाए।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब WhatsApp मोबाइल नंबर छिपाकर Username के जरिए चैट शुरू करने की सुविधा लाने की तैयारी में था। कंपनी का दावा है कि अकाउंट बनाने के लिए फोन नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा, लेकिन सरकार का मानना है कि पहचान छिपाने की यह नई व्यवस्था साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार बन सकती है।

सरकार को किस बात का डर?

सरकार का कहना है कि Username फीचर के जरिए ठग बैंक, सरकारी विभाग, कंपनियों या किसी परिचित व्यक्ति जैसे मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को आसानी से निशाना बना सकते हैं। इससे ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और डिजिटल ठगी के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका है। केंद्र का यह भी मानना है कि यह व्यवस्था मौजूदा आईटी एक्ट और आईटी रूल्स, 2021 के तहत जवाबदेही और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से Meta से तीन दिन के भीतर विस्तृत जवाब और जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं।

Meta की सफाई

WhatsApp की ओर से कहा गया है कि Username फीचर आने के बाद भी हर अकाउंट एक मोबाइल नंबर से ही जुड़ा रहेगा। कंपनी का दावा है कि सुरक्षा के लिए कई स्तर (Layers of Defense) तैयार किए गए हैं और कोई भी व्यक्ति तभी मैसेज भेज सकेगा, जब उसे सामने वाले का बिल्कुल सही Username पता होगा।

क्या वाकई बढ़ जाएगा खतरा?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा उपाय मौजूद होने के बावजूद भारत जैसे देश में डिजिटल साक्षरता अभी भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित करना आसान हो सकता है।

वरिष्ठ IPS अधिकारी अरुण बोथरा का कहना है कि Telegram पर Username आधारित पहचान ने पहले ही साइबर अपराधों की जांच को जटिल बनाया है। यदि यही मॉडल WhatsApp जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर लागू होता है, तो जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। वहीं, उद्यमी अंकुर वारिकू का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग वेरिफाइड अकाउंट और फर्जी प्रोफाइल के बीच अंतर नहीं समझते। ऐसे में अपराधी भरोसेमंद दिखने वाले यूजरनेम बनाकर लोगों से पैसे मांग सकते हैं और आम लोग आसानी से उनके जाल में फंस सकते हैं।

यह विवाद सिर्फ एक नए फीचर का नहीं, बल्कि ‘प्राइवेसी बनाम पब्लिक सेफ्टी’ की बहस का है। एक तरफ यूजर्स अपनी पहचान छिपाने और अधिक गोपनीयता की मांग करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और जांच एजेंसियां साइबर अपराधों पर नियंत्रण को प्राथमिकता दे रही हैं। अब सबकी नजर Meta के जवाब पर होगी। यदि कंपनी सरकार की चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं दे पाती, तो भारत में WhatsApp का Username फीचर लंबे समय तक अटक सकता है।

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