महाराष्ट्र, https://dhadkannews.com : महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक आश्रम स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से अनुसूचित जनजाति समुदाय की तीन छात्राओं की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बताया जा रहा है कि छात्रावास में पर्याप्त संख्या में चारपाइयां उपलब्ध नहीं थीं। इसके चलते कई छात्राओं को फर्श पर सोना पड़ता था। इसी दौरान छह छात्राओं को सांप ने काट लिया।
एक कमरे में 79 छात्राएं, सुविधाओं पर बड़ा सवाल
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जिस छात्रावास में यह घटना हुई, वहां एक ही कमरे में 79 छात्राओं के रहने की बात सामने आई है। करीब 25 वर्षों से संचालित इस छात्रावास में सर्पदंश की घटनाएं पहले भी सामने आने का दावा किया जाता रहा है।
ऐसे में सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि छात्रावास में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का भी है।
NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान
घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट में घटना की परिस्थितियों के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती छात्राओं की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी भी मांगी गई है।
NHRC ने कहा है कि यदि मीडिया में सामने आई जानकारी सही पाई जाती है, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है। आयोग ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सर्पदंश के बढ़ते आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे
देश में सर्पदंश से होने वाली मौतें भी लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच देश में सर्पदंश से 984 मौतें दर्ज की गईं।
2023: 183 मौतें
2024: 370 मौतें
2025: 431 मौतें
महाराष्ट्र में भी दर्ज मौतों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 2 मौतों के मुकाबले 2025 में यह संख्या 25 तक पहुंच गई।
अब सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
गढ़चिरोली की यह घटना सिर्फ एक दुखद हादसा नहीं, बल्कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, आवासीय व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अगर लंबे समय से सर्पदंश का खतरा मौजूद था, तो उससे बचाव के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? छात्राओं को फर्श पर सोने की नौबत क्यों आई? और एक कमरे में इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं को रखने की स्थिति कैसे बनी?
इन सवालों के जवाब अब जांच और NHRC की रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल तीन परिवार अपनी बेटियों को खो चुके हैं, जबकि तीन छात्राएं अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रही हैं।



