लखनऊ/कानपुर, संवाददाता https://dhadkannews.com : आज देशभर में रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ एक त्योहार बनकर नहीं आया। घरों में सजी राखियों, मिठाइयों और उपहारों के बीच कहीं बचपन फिर से लौट आया।
वही बचपन… जब एक छोटी-सी बात पर भाई-बहन लड़ते थे, कुछ मिनट बाद फिर साथ बैठ जाते थे और अगले ही दिन एक-दूसरे के बिना रहने को तैयार नहीं होते थे।
आज वही भाई-बहन बड़े हो गए हैं। किसी की नौकरी दूसरे शहर में है, कोई शादी के बाद दूसरे घर में है, किसी की जिंदगी मोबाइल की स्क्रीन और मीटिंग्स में उलझी है। लेकिन रक्षाबंधन आते ही रिश्तों की वह पुरानी गर्माहट फिर दिखाई दी।
राखी छोटी थी, लेकिन यादें बहुत बड़ी
बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। भाइयों ने बहनों को उपहार दिए। मिठाइयां खिलाई गईं, आशीर्वाद लिया गया और तस्वीरें भी खिंचीं।
लेकिन इन सबके बीच सबसे खूबसूरत चीज शायद वह पल था, जब कुछ सेकंड के लिए दोनों की नजरों में वही बचपन दिखाई दिया।
वक्त ने घर बदल दिए, शहर बदल दिए, जिम्मेदारियां बदल दीं…लेकिन भाई-बहन का रिश्ता नहीं बदला।
इस बार गिफ्ट से ज्यादा मायने रखता था ‘समय’
आज के दौर में सबसे महंगा तोहफा शायद कोई सामान नहीं, बल्कि समय है। किसी भाई ने बहन के साथ बैठकर पुरानी बातें कीं। किसी बहन ने भाई के पसंदीदा पकवान बनाए। किसी ने दूर रह रहे भाई को वीडियो कॉल पर राखी बांधी।
कहीं बहन ट्रेन पकड़कर पहुंची तो कहीं भाई कई किलोमीटर का सफर तय करके घर आया। क्योंकि रिश्ते किलोमीटर से दूर हो सकते हैं, दिल से नहीं।
राखी सिर्फ सुरक्षा का वादा नहीं
रक्षाबंधन को अक्सर भाई की ओर से बहन की रक्षा के वादे के रूप में देखा जाता है। लेकिन आज का रिश्ता इससे कहीं आगे है।
अब बहन भी भाई की ताकत है। उसकी परेशानी में साथ खड़ी होती है, उसके संघर्ष को समझती है और जरूरत पड़ने पर उसे संभालती है। इसलिए आज की राखी का संदेश शायद इतना ही है—रक्षा एक की जिम्मेदारी नहीं, रिश्ते की जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया पर तस्वीरें रहेंगी, लेकिन याद पल रहेगा
आज सोशल मीडिया पर भाई-बहन की तस्वीरें खूब दिखाई दीं। किसी ने राखी की फोटो डाली, किसी ने बचपन की तस्वीर के साथ आज की तस्वीर जोड़ दी।लेकिन तस्वीरें तो कुछ सेकंड में स्क्रॉल हो जाएंगी।
जो याद रह जाएगा, वह होगा वह पल जब भाई ने बहन की कलाई आगे बढ़ाकर राखी बंधवाई…और वह मुस्कान, जिसमें बिना बोले हजार बातें थीं।
रक्षाबंधन का असली उत्सव
रक्षाबंधन की असली खूबसूरती महंगी राखी, बड़े गिफ्ट या सोशल मीडिया पोस्ट में नहीं है। वह उस रिश्ते में है जहां भाई-बहन एक-दूसरे से कह सकें—
“जिंदगी चाहे जितनी बदल जाए, जरूरत पड़ने पर मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा।”
आज राखी का धागा कलाई पर बंधा है।
लेकिन उसकी गांठ शायद दिल में लगी है।
यही वजह है कि रक्षाबंधन हर साल आता है… और हर बार बचपन की कोई न कोई भूली हुई याद साथ लेकर चला जाता है।



