गुरुग्राम, https://dhadkannews.com : गुरुग्राम में मंगलवार की बारिश ने सिर्फ सड़कों को नहीं डुबोया, बल्कि फिर से उस चमकदार साइबर सिटी के उन दावों को भी पानी में बहा दिया, जिनमें हर साल बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मॉनसून की तैयारियों की बातें की जाती हैं।
सुबह से हुई भारी बारिश के बाद गुरुग्राम के कई हिस्सों में ऐसा जलभराव हुआ कि सड़क और नाला एक-दूसरे में फर्क करना मुश्किल हो गया। सबसे परेशान करने वाली तस्वीरें स्कूल बसों की रहीं, जहां बच्चे घंटों तक पानी के बीच फंसे रहे।
कहीं बच्चे बस से उतरकर घुटनों तक पानी में बाहर निकलने को मजबूर हुए तो कहीं मासूम घंटों तक बस के भीतर बैठे रहे। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि बारिश कितनी हुई—सवाल यह है कि इतनी बारिश के बाद भी शहर की सड़कें बच्चों के लिए सुरक्षित क्यों नहीं थीं?
चार घंटे बस में बच्चा… आखिर किसकी जिम्मेदारी?
गुरुग्राम के सेक्टर-47 में रेल विहार के पास, सुभाष चौक और आसपास के कई इलाकों में स्कूल बसें जलभराव में फंस गईं। बच्चों के माता-पिता सोशल मीडिया पर मदद और जवाब मांगते नजर आए। एक यूजर ने दावा किया कि उसका बच्चा चार घंटे से ज्यादा समय तक स्कूल बस में फंसा रहा।
यह सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जो बारिश के दिनों में ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्कूल बस रूट और आपातकालीन निकासी की तैयारी के दावे तो करती है, लेकिन कुछ घंटों की बारिश में बच्चों से भरी बसों को पानी के बीच खड़ा देखती रहती है।
‘साइबर सिटी’ की सड़कें या पानी का जाल?
गुरुग्राम की पहचान देश के बड़े कॉर्पोरेट और आईटी हब के रूप में होती है। लेकिन बारिश आते ही कई प्रमुख सड़कें ऐसी दिखाई देती हैं जैसे शहर का पूरा ड्रेनेज सिस्टम छुट्टी पर चला गया हो।
नरसिंहपुर, हीरो होंडा चौक, राजीव चौक, इफको चौक, रेलवे रोड, सेक्टर-5, ओल्ड दिल्ली रोड, महरौली रोड और बसई रोड समेत कई इलाकों में जलभराव ने वाहनों की रफ्तार रोक दी। राजीव चौक के आसपास वाहन पानी में फंसे रहे। सोहना रोड पर स्कूल बसों और एम्बुलेंस तक के फंसने की खबर सामने आई।
यानी जिस शहर में रोज लाखों लोग काम पर पहुंचने के लिए सड़कों पर निकलते हैं, वहां बारिश के बाद सड़क सबसे पहले सफर का रास्ता नहीं, जोखिम का रास्ता बन गई।
एक्सप्रेसवे भी नहीं बचा, एम्बुलेंस तक फंसी
सबसे गंभीर तस्वीर दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे से सामने आई, जहां एम्बुलेंस भी जलभराव के कारण प्रभावित हुईं। साइबर हब के पास गेटवे टावर मेट्रो स्टेशन के सामने एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। शीतला माता रोड पर भी जलभराव ने पुरानी समस्या को फिर सामने ला दिया।
हर मॉनसून में जिन जगहों पर पानी भरने की शिकायतें आती हैं, वहां सवाल अब यह नहीं होना चाहिए कि “आज कितना पानी भरा?”
सवाल लाजिमी है—“हर साल पानी भरता है, फिर स्थायी समाधान कब होगा?”
दोपहर 1:30 बजे तक 70 मिमी बारिश, लेकिन आफत कई गुना बड़ी
जिला प्रशासन के मुताबिक गुरुग्राम में दोपहर करीब 1:30 बजे तक 70 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश की मात्रा अपने आप में बड़ी हो सकती है, लेकिन असली परीक्षा किसी शहर की बारिश झेलने की क्षमता की होती है।
अगर कुछ घंटों की बारिश में—
- स्कूल बसें फंस जाएं,
- बच्चे घंटों बसों में बैठे रहें,
- एम्बुलेंस रास्ते में अटक जाएं,
- एक्सप्रेसवे डूब जाए,
- प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक थम जाए,
तो फिर सवाल सिर्फ मौसम का नहीं रह जाता। यह शहर की तैयारी का सवाल बन जाता है।
हर साल शिकायत, हर साल पानी… बदला क्या?
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भी इसी बात को लेकर दिखाई दिया। एक यूजर ने सवाल उठाया कि उसका बच्चा चार घंटे से अधिक समय से बस में फंसा हुआ था। दूसरे यूजर ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए सिस्टम में बड़े बदलाव की मांग की। एक अन्य यूजर की शिकायत का सार यही था कि लोग वर्षों से गुरुग्राम में जलभराव की समस्या बताते आ रहे हैं, लेकिन हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता।
यही गुरुग्राम की सबसे बड़ी विडंबना है—
शिकायतें पुरानी हैं, बारिश नई नहीं है, लेकिन समाधान अब भी ‘अगली बारिश’ के भरोसे है।
प्रशासन ने फिर से WFH और ऑनलाइन क्लास का रास्ता चुना
जलभराव और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की सलाह और स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाओं का निर्देश जारी किया।डिप्टी कमिश्नर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के चेयरमैन उत्तम सिंह के मुताबिक कॉर्पोरेट और निजी कार्यालयों के लिए घर से काम करने की सलाह 25 अगस्त को भी लागू रहेगी।
जिले के सरकारी और निजी स्कूलों तथा शिक्षण संस्थानों को भी मंगलवार को ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए। यह फैसला बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—
क्या हर भारी बारिश का समाधान स्कूल बंद करना और लोगों को घर बैठाना ही रह जाएगा?
अधिकारी सड़कों पर उतरे, लेकिन जनता पूछ रही है—स्थायी समाधान कब?
बारिश के दौरान नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारी जलभराव वाले इलाकों में सक्रिय रहे। नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया और अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त यश जालुका ने GMDA, NHAI और नगर निगम अधिकारियों के साथ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। ट्रैफिक पुलिस ने भी सिरहौल बॉर्डर, राजीव चौक, नरसिंहपुर सहित कई स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
बारिश के दौरान अधिकारी सड़क पर उतरते हैं, पानी उतरने के बाद क्या वही अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि अगली बारिश में वही सड़क दोबारा न डूबे?
यही वह सवाल है जिसका जवाब गुरुग्राम के लोग वर्षों से तलाश रहे हैं।
गुरुग्राम की असली बारिश सड़क पर नहीं, सिस्टम के भीतर हुई
आज की बारिश ने सिर्फ गाड़ियां नहीं रोकीं।
इसने सवाल रोक दिए हैं—
- जवाबदेही कहां है?
- ड्रेनेज प्लान कहां है?
- बार-बार डूबने वाले इलाकों का स्थायी इलाज कहां है?
- स्कूल बसों के लिए बारिश के दिनों की वैकल्पिक व्यवस्था कहां है?
- और सबसे बड़ा सवाल—मॉनसून आने से पहले तैयारी आखिर कितनी हुई थी?
गुरुग्राम को साइबर सिटी कहा जाता है। ऊंची इमारतें, एक्सप्रेसवे, मेट्रो और कॉर्पोरेट टावर इसकी तस्वीर का चमकदार हिस्सा हैं। लेकिन जब बारिश होती है तो शहर का दूसरा चेहरा सामने आता है—
एक ऐसा शहर जहां करोड़ों रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ घंटों के पानी के सामने बेबस नजर आता है और स्कूल बस में बैठे बच्चे सिस्टम की सबसे कमजोर कड़ी बन जाते हैं।
बारिश हर साल होगी। जलभराव भी अगर हर साल होगा, तो फिर फर्क सिर्फ इतना रहेगा कि पानी सड़क पर होगा या जिम्मेदारी की फाइलों में। अब गुरुग्राम को बारिश से नहीं, उसी पुराने बहाने से बचाने की जरूरत है—“बारिश ज्यादा हो गई थी।”



