नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर शुरू हुआ विरोध अब राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने रफ्तार पकड़ ली है। शनिवार, 1 अगस्त से आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल देशभर में E20 के खिलाफ एक व्यापक जनजागरण अभियान शुरू करने जा रहे हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने मौन मार्च और भूख हड़ताल के जरिए आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है।
अब सिर्फ ईंधन नहीं, जनता से जुड़े सवालों की लड़ाई
E20 को लेकर विरोध केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं रह गया है। आंदोलन से जुड़े लोग इसे आम जनता, छात्रों, मध्यम वर्ग और वाहन मालिकों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि नीति पर व्यापक चर्चा और वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हुए तो इसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस विषय पर पर्याप्त सार्वजनिक संवाद नहीं किया, जबकि सरकार का पक्ष है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन आयातित तेल पर निर्भरता कम करेगा, किसानों की आय बढ़ाएगा और प्रदूषण घटाने में मदद करेगा।
केजरीवाल का राष्ट्रीय अभियान
आम आदमी पार्टी के अनुसार, 1 अगस्त से देशभर में जनसभाएं, संवाद कार्यक्रम और हस्ताक्षर अभियान चलाए जाएंगे। पार्टी का दावा है कि लोगों को E20 से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी और उनकी राय भी जुटाई जाएगी।
तहसीन पूनावाला का ऐलान
एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर मौन मार्च निकालेंगे और आवश्यकता पड़ने पर भूख हड़ताल भी करेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी एक दल का नहीं बल्कि आम नागरिकों की आवाज़ है।
सरकार पर बढ़ेगा दबाव?
लगातार बढ़ते विरोध के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस आंदोलन पर क्या प्रतिक्रिया देती है। यदि आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलता है तो आने वाले दिनों में E20 देश की सबसे चर्चित नीतिगत बहसों में शामिल हो सकता है।
1 अगस्त से शुरू होने वाला अभियान यह तय करेगा कि E20 पर विरोध सीमित रहता है या राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप लेता है। फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा अब केवल विशेषज्ञों की बहस नहीं, बल्कि राजनीतिक और जनसरोकार का बड़ा विषय बन चुका है।



