निर्विघ्न सिंह
नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद देश में ऐसा लग रहा था कि विवाद खत्म हो चुका है। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति को लोकतंत्र की जीत बताया गया। लेकिन अब हालात फिर बदलते दिखाई दे रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का दावा है कि सरकार ने छात्रों से जो भरोसा किया था, वह अब टूटता नजर आ रहा है।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि छात्रों को पुलिस द्वारा परेशान करने का सिलसिला नहीं रुका और FIR वापस नहीं ली गईं, तो CJP एक बार फिर देशव्यापी और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगी।
सिर्फ FIR का मुद्दा नहीं, भरोसे का सवाल
इस पूरे विवाद का केंद्र केवल कानूनी कार्रवाई नहीं है, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता भी है। CJP का कहना है कि 25 जुलाई को सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा और किसी भी छात्र को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परेशान नहीं किया जाएगा।
पार्टी का आरोप है कि उसी भरोसे के आधार पर आंदोलन वापस लिया गया। अब यदि वही छात्र फिर पुलिस कार्रवाई का सामना करते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि सरकारी वादे से पीछे हटना माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर क्यों उठ रहे सवाल?
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के एक विशेष निर्देश पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अदालत ने सरकारों को पहले से दर्ज FIR पर जांच जारी रखने की अनुमति दी है।
पार्टी का आरोप है कि यदि सरकार चाहे तो इस आदेश का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी रखने के लिए कर सकती है। हालांकि CJP का यह भी कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद सरकार के पास FIR वापस लेने और कार्रवाई रोकने का अधिकार बना हुआ है। इसलिए कोर्ट के आदेश को बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
सरकार की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
CJP का एक और आरोप यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आया, तब सरकार के वकीलों ने उस अंतरिम आदेश का विरोध नहीं किया, जबकि सरकार और CJP के बीच बातचीत एवं समझौते की प्रक्रिया जारी थी।
यहीं से राजनीतिक बहस शुरू होती है। यदि सरकार वास्तव में अपने आश्वासन पर कायम है, तो अब तक स्पष्ट आदेश क्यों नहीं आए? और यदि आश्वासन बदल गया है, तो इसकी आधिकारिक जानकारी क्यों नहीं दी गई?
क्या फिर लौटेगा छात्र आंदोलन?
अभिजीत दिपके का संदेश केवल राजनीतिक चेतावनी नहीं बल्कि एक संकेत भी माना जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में FIR वापस नहीं होतीं या छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है, तो CJP दोबारा सड़कों पर उतर सकती है।
ऐसी स्थिति में देश एक बार फिर बड़े छात्र आंदोलन की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर राजनीति से लेकर शिक्षा व्यवस्था तक दिखाई दे सकता है।
यह पूरा विवाद अब केवल CJP बनाम सरकार नहीं रह गया है। असली सवाल यह है कि—
- क्या सरकार द्वारा किया गया सार्वजनिक आश्वासन अब भी लागू है?
- क्या अदालत के अंतरिम आदेश की आड़ में छात्रों पर कार्रवाई जारी रहेगी?
- यदि सरकार FIR वापस लेने के पक्ष में है तो अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
- और सबसे बड़ा सवाल—क्या लोकतंत्र में संवाद से निकला समझौता अदालत की प्रक्रिया और सरकारी कार्रवाई के बीच कहीं खो गया है?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में देश की राजनीति और छात्र आंदोलनों की दिशा तय कर सकते हैं।



