नई दिल्ली, https://dhadkannews.com :36 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
दीपके ने मीडिया से कहा, “झुकती है दुनिया, बस झुकाने वाला चाहिए। कहा जाता था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन इस्तीफा हुआ। हर दिन मुझसे पूछा जाता था कि क्या इस्तीफा होगा, लेकिन आखिरकार सरकार झुक गई।”
उन्होंने आगे कहा कि जब वे अमेरिका से भारत लौटे थे, तब कई लोग आंदोलन की सफलता पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन आज का दिन उन सभी सवालों का जवाब है।
जंतर-मंतर पर जश्न, समर्थकों में उत्साह
इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर दीपके के समर्थकों ने नारे लगाए और इसे छात्रों तथा युवाओं की आवाज़ की जीत बताया। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि युवाओं के संघर्ष का परिणाम है।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे में क्या कहा?
प्रधान ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा कि देश-विरोधी तत्व मौजूदा स्थिति का लाभ न उठा सकें, देश में एकता बनी रहे और छात्र किसी कानूनी विवाद में न फंसें, इसलिए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया है।
‘युवाओं की भावनाओं का सम्मान करता हूं’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे चार दशकों से शिक्षा और छात्रों के हित में कार्य करते रहे हैं। उन्होंने लिखा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और न्यायोचित अपेक्षाओं का वे गहरा सम्मान करते हैं तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया।
अब आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक पक्ष इसे छात्रों के आंदोलन की ऐतिहासिक जीत बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का उदाहरण मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।



