नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : बदलती दुनिया में अब सिर्फ घर, कार, कपड़े या फर्नीचर ही किराए पर नहीं मिलते। अब इंसानी साथ भी किराए पर मिलने लगा है।
जी हां… Rental Boyfriend या Boyfriend on Rent नाम की यह सर्विस सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। पहली नजर में यह डेटिंग या एडल्ट सर्विस जैसी लग सकती है, लेकिन इसकी असल कहानी बिल्कुल अलग है। यहां न रोमांस की गारंटी है, न रिश्ते का वादा… सिर्फ तय समय के लिए एक प्रोफेशनल कंपैनियन।
आखिर क्यों पैदा हुई ऐसी जरूरत?
कल्पना कीजिए…
- आप किसी नए शहर में अकेले रहते हैं।
- दोस्त नहीं हैं।
- वीकेंड पर कॉफी पीने वाला कोई नहीं।
- किसी शादी में अकेले जाने का मन नहीं।
- या फिर अस्पताल में किसी का साथ चाहिए।
इन्हीं छोटी-छोटी जरूरतों ने एक ऐसे बिजनेस को जन्म दिया, जिसकी शायद कुछ साल पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
जापान से शुरू हुई ‘Companion Economy’
1990 के दशक में जापान में अकेले रहने वालों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। काम का दबाव, सीमित सामाजिक जीवन और बढ़ता अकेलापन लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित करने लगा।
तभी कुछ कंपनियों ने एक नया आइडिया निकाला—People for Rent।
शुरुआत में लोग शादी में मेहमान, नकली रिश्तेदार, बातचीत करने वाले साथी और सामाजिक आयोजनों में साथ जाने वाले लोगों को किराए पर देने लगे। बाद में इसी मॉडल ने Rental Boyfriend और Rental Girlfriend जैसी सेवाओं का रूप ले लिया।
यहां प्यार नहीं… सिर्फ समय बिकता है
रेंटल बॉयफ्रेंड का मतलब प्रेमी बनना नहीं होता। ग्राहक केवल कुछ घंटों के लिए किसी व्यक्ति का समय बुक करता है।
वह उसके साथ—
- कॉफी पी सकता है।
- शॉपिंग कर सकता है।
- मूवी देख सकता है।
- पार्क या म्यूजियम घूम सकता है।
- किसी इवेंट में साथ जा सकता है।
- मेडिकल अपॉइंटमेंट में भावनात्मक सहयोग ले सकता है।
यानी यहां रिश्ता नहीं, समय किराए पर लिया जाता है।
लेकिन एक नियम सबसे अहम है…
अगर आपको लगता है कि यह डेटिंग या एडल्ट सर्विस है, तो आप गलत हैं।
ज्यादातर कंपनियां पहले ही साफ कर देती हैं—
❌ किसी भी तरह का शारीरिक संबंध नहीं।
❌ होटल में मुलाकात नहीं।
❌ निजी जगह पर जाना मना।
✅ केवल सार्वजनिक स्थान।
✅ सम्मानजनक व्यवहार अनिवार्य।
यही वजह है कि इसे Companion Service कहा जाता है।
कितनी है कीमत?
विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार अनुमानित शुल्क—
- घूमने के लिए साथी – लगभग ₹1,500 प्रति घंटा
- क्लबिंग – लगभग ₹2,000 प्रति घंटा
- मूवी पार्टनर – लगभग ₹2,000 प्रति घंटा
- शॉपिंग बडी – लगभग ₹2,000 प्रति घंटा
- मेडिकल सपोर्ट – लगभग ₹2,000 प्रति घंटा
(दरें देश और प्लेटफॉर्म के अनुसार बदल सकती हैं।)
क्या भारत भी इस राह पर है?
भारत में यह ट्रेंड अभी शुरुआती दौर में है। कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Companion या Event Partner जैसी सेवाओं का दावा करते हैं, लेकिन यह अभी संगठित उद्योग नहीं बना है। हालांकि सोशल मीडिया पर इस कॉन्सेप्ट को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।
सवाल सिर्फ बिजनेस का नहीं, समाज का भी है
एक समय था जब इंसान रिश्ते खोजता था।
आज कई लोग सिर्फ कुछ घंटों का साथ तलाश रहे हैं।
यही बदलती जरूरत इस नए बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बन रही है।
क्या भविष्य में भारत में भी “Boyfriend on Rent” आम बात हो जाएगी, या यह सिर्फ एक विदेशी ट्रेंड बनकर रह जाएगा?
इस सवाल का जवाब आने वाला समय देगा, लेकिन इतना तय है कि Companion Economy अब दुनिया की सबसे तेजी से चर्चा में आने वाली नई सामाजिक और व्यावसायिक अवधारणाओं में शामिल हो चुकी है।



