लखनऊ, https://dhadkannews.com : उत्तर प्रदेश में सितंबर की बारिश ने इस बार मौसम की तस्वीर ही बदल दी है। पिछले करीब 48 घंटों से जारी तेज बारिश, आंधी और जलभराव ने शहरों से गांवों तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने और कई जनहानियों की सूचना है, जबकि अलग-अलग जिलों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि कई इलाकों में बारिश महज मौसम नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई और 24 घंटे में राज्य में सामान्य से करीब 19 गुना बारिश हुई। फर्रुखाबाद में यह आंकड़ा सामान्य से करीब 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना तथा कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में करीब 130 गुना तक पहुंचा।
आंकड़ों से आगे की कहानी—जब सड़क और घर के बीच का फर्क मिट गया
लखनऊ से लेकर गोरखपुर, कानपुर, बांदा और पूर्वांचल तक कई इलाकों में जलभराव ने यातायात और सामान्य गतिविधियों को प्रभावित किया। राजधानी लखनऊ में भी भारी बारिश दर्ज हुई, जबकि निचले इलाकों में पानी भरने की शिकायतें सामने आईं।
गोरखपुर में स्थिति खास तौर पर गंभीर दिखाई दी। लगातार बारिश के बीच शहर के कई प्रमुख बाजारों और मोहल्लों में पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया। रेती रोड, नखास चौक, घंटाघर, घोष कंपनी चौक, मियां बाजार, गोलघर, विजय चौक, अलीनगर, आर्यनगर, धर्मशाला बाजार, गीता प्रेस रोड, बेतियाहाता और आसपास के कई इलाकों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाईं। शहर में भारी बारिश के कारण पहले ही कक्षा 1 से 12वीं तक के स्कूलों को 26 सितंबर को बंद रखने का आदेश दिया गया था।
गोरखपुर में बारिश का रिकॉर्ड—कुछ घंटों में शहर पानी-पानी
गोरखपुर में शनिवार को हुई तेज बारिश के बाद कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कुछ घंटों के दौरान बेहद तेज बारिश हुई और शहर के बड़े हिस्से में जलभराव की स्थिति बन गई।
बारिश के बीच पेड़ गिरने और बिजली के पोल प्रभावित होने की सूचनाओं ने परेशानी और बढ़ा दी। कई जगह लोगों को घरों और दुकानों से पानी निकालने की जद्दोजहद करनी पड़ी।
जनप्रतिनिधियों के दौरे के बीच नाराजगी भी सामने आई
जलभराव का जायजा लेने निकले सांसद रवि किशन, महापौर और नगर निगम अधिकारियों को लेकर कुछ इलाकों में स्थानीय लोगों और व्यापारियों की नाराजगी सामने आई। कुछ स्थानों पर नगर निगम व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की गई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नारेबाजी और स्थानीय लोगों के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उनकी प्रतिक्रिया हैं, जबकि वास्तविक जलनिकासी व्यवस्था और उससे जुड़े कारणों का आकलन संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों का विषय है।
रवि किशन ने बारिश की अभूतपूर्व तीव्रता का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी बारिश की उम्मीद नहीं थी और जलनिकासी के लिए स्थायी तथा अस्थायी पंप चलाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से घरों में रहने और आकाशीय बिजली के खतरे से सावधान रहने की अपील भी की।
बारिश ने खेतों को भी नहीं छोड़ा
मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार पात्र किसानों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन को प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने, क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कराने और जरूरत पड़ने पर असुरक्षित घरों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
कहां कितने मकान प्रभावित?
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- बांदा: 32 मकान
- जालौन: 21 मकान
- हरदोई: 14 मकान
- औरैया: 7 मकान
- पीलीभीत: 7 मकान
- बहराइच: 5 मकान
- सुल्तानपुर: 5 मकान
इसके अलावा कई अन्य जिलों से भी मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है।
जनहानि ने बढ़ाई चिंता
राहत आयुक्त कार्यालय के शुरुआती आंकड़ों में पिछले 48 घंटों में बारिश और आंधी-तूफान से जनहानि, पशुहानि, मकानों के क्षतिग्रस्त होने और लोगों के घायल होने की सूचना दी गई थी। बाद की रिपोर्टों में अलग-अलग जिलों से और जनहानि की जानकारी सामने आई है, इसलिए आंकड़े लगातार अपडेट हो सकते हैं।
उन्नाव में एक्सप्रेसवे पर पानी, सियासत भी तेज
उन्नाव के सोनिक क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के बशीरतगंज टोल प्लाजा के पास जलभराव की खबर ने एक अलग बहस छेड़ दी। पानी भरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जलभराव का वीडियो साझा करते हुए एक्सप्रेसवे को तंज के तौर पर “गंगा एक्सप्रेस वॉटरवे” कहा। यह टिप्पणी उनके राजनीतिक हमले का हिस्सा थी।
प्रशासन अलर्ट—राहत और बचाव टीमें तैयार
राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को जरूरत के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव, कच्चे मकानों और संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
राज्य राहत हेल्पलाइन: 1070
गोरखपुर प्रशासन ने भी आपदा और सहायता के लिए स्थानीय हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
‘अर्नब’ पर एक जरूरी तथ्य
बंगाल की खाड़ी से बने मौसम सिस्टम को कई मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में ‘चक्रवात अर्नब’ कहा गया है। लेकिन मौसम विभाग की रिपोर्टों के अनुसार यह सिस्टम डीप डिप्रेशन के रूप में तट से आगे बढ़ा और आधिकारिक तौर पर चक्रवाती तूफान की श्रेणी तक नहीं पहुंचा। “अर्नब” नाम अगले संभावित चक्रवाती तूफान के लिए नामों की सूची में था, जिसके कारण इसे लेकर भ्रम पैदा हुआ।
यूपी में मौजूदा भारी बारिश के लिए बाद में मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बने दबाव क्षेत्र की गतिविधि भी महत्वपूर्ण रही। 26 सितंबर को यह सिस्टम दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा था और IMD ने पूर्वी यूपी में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई थी।
अब सबसे बड़ा सवाल—बारिश रुकेगी तो पानी कब उतरेगा?
मौसम विभाग के अनुसार बारिश की गतिविधि 27 सितंबर तक कई इलाकों में बनी रह सकती है। इसके बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की संभावना जताई गई है। लेकिन जिन इलाकों में जलभराव, फसल नुकसान और मकानों को क्षति हुई है, वहां असली चुनौती बारिश थमने के बाद शुरू होगी—पानी की निकासी, क्षति का सही आकलन और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की।
‘DHADKAN NEWS’ की नजर में इस बारिश की सबसे बड़ी तस्वीर यही है—आंकड़े चाहे 19 गुना बारिश बताएं, लेकिन जमीन पर इसकी असली कहानी उन घरों, दुकानों, खेतों और सड़कों में दिखाई दे रही है जहां पानी ने कुछ घंटों के लिए जिंदगी की रफ्तार रोक दी।



