लखनऊ, https://dhadkannews.com: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के लिए जेल से बाहर आने की खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। रामपुर जेल से रिहाई होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें एक बार फिर अपनी गिरफ्त में ले लिया। जिस वक्त आजम खान जेल से बाहर निकलने वाले थे, उससे पहले ही ED की टीम जेल के बाहर पहुंच चुकी थी। जैसे ही रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई, जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेकर अपनी गाड़ी में बैठा लिया।
इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। खास बात यह रही कि आजम खान की रिहाई और ED की कार्रवाई लगभग एक ही समय पर हुई। यानी जेल से बाहर निकलने के बाद उन्हें राहत की सांस लेने का मौका तक नहीं मिला।
‘मुसलमान होने की सजा है’ – गिरफ्तारी के दौरान छलका आजम खान का दर्द
ED अधिकारियों के साथ जाते समय आजम खान ने अपनी नाराजगी और पीड़ा जाहिर करते हुए कहा, “कहने को क्या है? क्या कहने को है? कहने को रहा क्या है? मुसलमान होने की सजा है।”
उन्होंने आगे कहा कि उनका गुनाह सिर्फ इतना है कि उन्होंने एक यूनिवर्सिटी बनाई। आजम खान के शब्दों में, “एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई, बच्चों के स्कूल बनाए, यही हमारा गुनाह है।”
आजम खान के इस बयान ने मामले को केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बना दिया है।
जौहर यूनिवर्सिटी पर ED की नजर, 499 करोड़ की लागत पर उठे सवाल
आजम खान की गिरफ्तारी का संबंध मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले से बताया जा रहा है। ED ने इस मामले में 13 अक्टूबर को केस दर्ज किया था।
जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के निर्माण और विस्तार के लिए किसानों की जमीन कथित तौर पर जबरन हासिल की गई और उसका इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा वर्ष 2016 में कई मकानों को गिराने तथा सरकारी परियोजनाओं से जुड़े सामान और उपकरणों का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर में किए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।
ED को संदेह है कि कथित अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संपत्तियों की खरीद तथा निर्माण में किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी की अनुमानित लागत करीब 499.09 करोड़ रुपये है, जबकि जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दर्शाया गया है। इसी अंतर को लेकर वित्तीय लेन-देन और धन के स्रोतों की जांच की जा रही है।
हालांकि, ये सभी जांच एजेंसी के आरोप और जांच के विषय हैं। इन पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
शुक्रवार को मिली जमानत, लेकिन जेल से निकलते ही नया कानूनी मोर्चा
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिली थी।
पिछले साल नवंबर में इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद दोनों रामपुर जेल में बंद थे। हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान की रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। लेकिन जेल के बाहर ED की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। एक मामले में जमानत मिलने के बाद दूसरे मामले में गिरफ्तारी ने आजम खान की कानूनी मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं।
राहत और गिरफ्तारी के बीच उलझी आजम खान की सियासत
आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक चर्चित और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों और कानूनी कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार बहस होती रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ED के मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और आजम खान को अदालत से अगली राहत कब मिलेगी?
फिलहाल, जेल से रिहाई के कुछ ही पलों बाद हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आजम खान की कानूनी मुश्किलें अभी और लंबी चलने वाली हैं?



