मथुरा/लखनऊ, https://dhadkannews.com : वृंदावन की गलियों में भजन और साधना के बीच शुक्रवार को हुई एक मौत ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब पुलिस जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और CCTV फुटेज से तलाशा जा रहा है। गुरु कृपा कुंज आश्रम में रहने वाले दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर उस सुबह आश्रम की चौथी मंजिल पर क्या हुआ था?
मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी दीपक लोधी पिछले करीब दो वर्षों से प्रेमानंद महाराज से जुड़े हुए थे। सितंबर 2025 में उन्होंने दीक्षा ली थी और इसके बाद उनका नाम रसिक दुलारी शरण रखा गया। वह वृंदावन में रहकर भजन-साधना करते थे और बिजली का काम भी जानते थे। लेकिन शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे की घटना ने उनके जीवन की कहानी को अचानक एक रहस्य में बदल दिया।
कमरे में मिला खून से सना ग्राइंडर
पुलिस को दीपक के कमरे से एक ग्राइंडर मिला है, जिस पर खून के निशान बताए जा रहे हैं। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के साथ प्राइवेट पार्ट कटे होने की बात भी सामने आई है। यही बिंदु जांच को सबसे संवेदनशील बना रहा है।
पुलिस की शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। आशंका है कि दीपक ने पहले ग्राइंडर से खुद को घायल किया और इसके बाद चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। लेकिन पुलिस ने अभी इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। हत्या की आशंका समेत दूसरे सभी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
CCTV के वो तीन मिनट, जिनमें दर्ज है आखिरी सफर
इस मामले में CCTV फुटेज को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब तीन मिनट के फुटेज में दीपक की आखिरी गतिविधियां दिखाई देती हैं। वह चौथी मंजिल की छत की ओर जाता दिखाई देता है। इसके बाद बाउंड्री वॉल पर बैठता है, फिर कुछ समय वहां लेटता है और अंत में नीचे छलांग लगाता दिखाई देता है।
पुलिस ने संबंधित DVR को अपने कब्जे में ले लिया है।अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि CCTV में दिखाई देने वाली गतिविधियों से पहले और बाद में क्या हुआ था। क्या फुटेज पूरी घटना को रिकॉर्ड करता है या उसके पहले की कोई गतिविधि कैमरे की नजर से बाहर रही?
एक मौत, लेकिन जांच के सामने कई सवाल
इस घटना में कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब जांच के लिए बेहद अहम हैं—
- ग्राइंडर पर मिले खून के निशान किन परिस्थितियों में आए?
- क्या चोटें खुद लगाई गईं या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी?
- CCTV फुटेज में दिख रही गतिविधियों से पहले क्या हुआ?
- क्या आश्रम में उस समय कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था?
- मृतक ने घटना से पहले किससे फोन पर बातचीत की?
- आश्रम प्रबंधन ने पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी?
- पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच CCTV में दिखाई दे रही कहानी से कितनी मेल खाती है?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस को सूचना अस्पताल से मिली
घटना के बाद दीपक को गंभीर हालत में सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार घटना की जानकारी उसे अस्पताल से मिली। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे तथा घटनास्थल का निरीक्षण किया।
आश्रम प्रबंधन की ओर से पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई, इसे लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि सूचना में देरी किन परिस्थितियों में हुई।
परिजनों के बयान ने भी खड़े किए सवाल
दीपक के परिजन देर रात वृंदावन पहुंचे। उनके जीजा सोनू के मुताबिक उन्हें रात में बताया गया था कि दीपक गिर गया है और उसका ऑपरेशन होना है। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
प्राइवेट पार्ट कटे होने की जानकारी के बारे में पूछे जाने पर परिजनों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।सोनू ने यह भी कहा कि जब वे पहले दीपक से मिलने आश्रम आते थे तो कई बार उन्हें उससे मिलने नहीं दिया जाता था। हालांकि उन्होंने इस आधार पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया।
पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी, फोरेंसिक जांच पर नजर
पुलिस के अनुसार शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ किया। शुरुआती जानकारी में प्राइवेट पार्ट कटे होने और शरीर पर अन्य चोटों के निशान की बात सामने आई है। एक पैर में फ्रैक्चर भी बताया गया है।
छत से गिरने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव को मृत्यु का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
अब जांच की दिशा तय करेंगे चार सबूत
इस पूरे मामले में पुलिस की जांच मुख्य रूप से चार अहम कड़ियों पर टिकी दिखाई दे रही है—CCTV फुटेज, ग्राइंडर की फोरेंसिक जांच, मोबाइल डेटा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट।
इन चारों को एक साथ देखने के बाद ही यह तय करने में मदद मिलेगी कि दीपक ने खुद अपनी जान ली थी या घटनाक्रम के पीछे कोई दूसरी वजह थी। फिलहाल पुलिस ने किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
वृंदावन में हुई यह मौत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां कहानी सिर्फ चौथी मंजिल से गिरने की नहीं है। कमरे में मिला उपकरण, शरीर पर चोटें, CCTV में दर्ज आखिरी तीन मिनट और पुलिस को सूचना मिलने का समय—हर कड़ी अपने भीतर एक सवाल छिपाए हुए है।
अब असली जवाब जांच की उन कड़ियों में छिपा है, जिन्हें पुलिस जोड़ रही है।



