लखनऊ, https://dhadkannews.com : अगर आपके वाहन का चालान कटा है और आपको लगता है कि यह गलती से हुआ है, तो अब मामला सिर्फ जुर्माना भरने या कोर्ट जाने तक सीमित नहीं रहेगा। ई-चालान को चुनौती देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। Central Motor Vehicles (Third Amendment) Rules, 2026 में चालान को contest करने के लिए पहले संबंधित प्राधिकरण के सामने अपनी आपत्ति और दस्तावेजी सबूत रखने की व्यवस्था की गई है।
यानी गलत चालान को लेकर अब पहला सवाल यह नहीं होगा कि “कोर्ट कब जाएं?”, बल्कि यह होगा कि “पहले चालान की आपत्ति किस प्राधिकरण के सामने दर्ज करनी है?”
🔎 सबसे पहले समझिए—नई व्यवस्था में क्या बदला?
नए Rule 167 के तहत चालान मिलने के बाद वाहन मालिक को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे स्वीकार करके भुगतान करने या पोर्टल के माध्यम से आपत्ति दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। आपत्ति के साथ संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
मामले की जांच संबंधित प्राधिकरण करेगा। यदि चालान गलत पाया जाता है तो उसे समाप्त किया जा सकता है। वहीं यदि आपत्ति खारिज कर दी जाती है, तो आगे अदालत जाने का रास्ता खुला रहेगा।
📱 गलत चालान है तो सबूत जुटाइए
यदि आपको लगता है कि चालान गलत तरीके से जारी हुआ है, तो केवल “मैंने नियम नहीं तोड़ा” लिखना पर्याप्त नहीं होगा। अपनी आपत्ति के साथ उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण होगा।
कैमरा आधारित चालान के मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड की भूमिका खास हो सकती है। इसी वजह से नई व्यवस्था का फोकस केवल शिकायत पर नहीं, बल्कि शिकायत के साथ प्रमाण पर भी है।
⏱️ 30 दिन में फैसला नहीं तो क्या होगा?
यहां एक अहम बात वाहन चालकों को समझनी होगी। संशोधित Rule 167 में प्रावधान है कि यदि व्यक्ति चालान contest करता है और संबंधित प्राधिकरण निर्धारित अवधि में मामले का निस्तारण नहीं करता, तो चालान प्रभावहीन हो जाएगा और इसका आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाना है।
यानी आपत्ति लंबित रहने की स्थिति में मामला अनिश्चित समय तक खिंचता रहने के बजाय नियम में समय-सीमा आधारित व्यवस्था रखी गई है।
⚖️ अधिकारी ने चालान सही माना तो क्या?
अगर संबंधित प्राधिकरण आपकी आपत्ति को खारिज कर देता है, तो आपके पास दो रास्ते होंगे—
- पहला: निर्धारित समय में चालान की राशि जमा कर दें।
- दूसरा: फैसले से असहमत होने पर अदालत में आवेदन करें।
लेकिन अदालत का रास्ता चुनने की स्थिति में संशोधित नियम के अनुसार चालान की कुल राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। इसे चालान स्वीकार करना नहीं माना जाता। यह अदालत में मामले को आगे बढ़ाने की निर्धारित शर्त है।
💰 50% जमा करने का मतलब चालान सही मान लेना नहीं
मान लीजिए आपका चालान ₹5,000 का है। प्राधिकरण ने आपकी आपत्ति खारिज कर दी और आपने अदालत जाने का फैसला किया। ऐसी स्थिति में नियम के अनुसार ₹2,500 जमा करने होंगे।
इसके बाद अदालत मामले की सुनवाई करेगी। यानी 50 प्रतिशत राशि जमा करने से यह अपने-आप साबित नहीं होता कि चालान सही है।
अदालत ने चालान गलत माना तो?
यदि अदालत आपके पक्ष में फैसला देती है और चालान को गलत ठहराती है, तो नियम के अनुसार जमा की गई राशि की वापसी का रास्ता रहेगा।
वहीं यदि अदालत चालान को बरकरार रखती है, तो बची हुई राशि का भुगतान करना होगा। Rule 167 में इस पूरी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती से जोड़कर रखा गया है।
🚨 चालान को महीनों तक लटकाना पड़ सकता है भारी
नई व्यवस्था में चालान के निस्तारण के लिए समय-सीमाएं तय की गई हैं। यदि व्यक्ति प्राधिकरण के आदेश के बाद न तो चालान जमा करता है और न निर्धारित समय में अदालत में चुनौती देता है, तो नियम के तहत चालान को स्वीकार किया हुआ माना जा सकता है और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
इसलिए “बाद में देखेंगे” वाला रवैया वाहन मालिक के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
📌 वाहन चालकों के लिए पूरी प्रक्रिया एक नजर में
- चालान जारी हुआ →
- आपको लगता है गलत है →
- ऑनलाइन पोर्टल पर आपत्ति + दस्तावेजी सबूत →
- संबंधित प्राधिकरण जांच करेगा →
- गलत पाया गया → चालान समाप्त
- सही पाया गया → भुगतान या अदालत जाने का विकल्प
- अदालत जाना है → चालान की 50% राशि जमा → फिर कोर्ट में आवेदन
⚠️ यूपी को लेकर एक जरूरी बात
उत्तर प्रदेश में इस केंद्रीय नियम के लागू होने और स्थानीय स्तर पर किस अधिकारी को किस क्षेत्र के चालानों की अपील सुनने के लिए नामित किया गया है, इसकी राज्य-स्तरीय अधिसूचना/कार्यान्वयन व्यवस्था को अलग से देखना जरूरी है। उपलब्ध केंद्रीय नियम Rule 167 में “authority referred in sub-rule (5)” की व्यवस्था करता है, लेकिन केवल केंद्रीय अधिसूचना के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि हर जिले में ARTO ही निश्चित रूप से अपीलीय अधिकारी है और वह दूसरे जिले के चालानों की अपील सुनेगा, जब तक यूपी सरकार/परिवहन विभाग की ऐसी नामित व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि न हो।
यानी वाहन मालिकों के लिए असली बदलाव साफ है—गलत चालान के खिलाफ आपत्ति का रास्ता अब ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल हो रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अपीलीय अधिकारी और पोर्टल की प्रक्रिया के लिए यूपी परिवहन विभाग के आधिकारिक निर्देश देखना जरूरी होगा।
📝 वाहन मालिक क्या संभालकर रखें?
- चालान नंबर और तारीख
- वाहन की RC/अन्य संबंधित दस्तावेज
- चालान की फोटो या डिजिटल कॉपी
- CCTV/कैमरा रिकॉर्ड से जुड़ा उपलब्ध प्रमाण
- घटना के समय की फोटो/वीडियो
- ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने की रसीद/acknowledgement
- अधिकारी के आदेश की कॉपी
एक गलती से कटे चालान को चुनौती देने का रास्ता अब सिर्फ “कोर्ट या भुगतान” नहीं रह गया है। पहले डिजिटल आपत्ति, फिर प्राधिकरण की जांच और उसके बाद जरूरत पड़ने पर अदालत—यही नई व्यवस्था का मूल ढांचा है।



