नई दिल्ली, संवाददाता https://dhadkannews.com: राजधानी में सरकारी अस्पतालों के लिए मुफ्त दी जाने वाली दवाओं की हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 70 लाख रुपये से ज्यादा की दवाएं बरामद की हैं। इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से इस अवैध धंधे में सक्रिय थे।
सड़क पर पकड़ा गया ‘दवा कनेक्शन’
पुलिस ने 2 अप्रैल को तीस हजारी के राजेंद्र बाजार इलाके में एक महिंद्रा चैंपियन टेम्पो और एक बलेनो कार को रोककर तलाशी ली। इसमें भारी मात्रा में सरकारी दवाएं बरामद हुईं, जिन पर साफ लिखा था—“सरकारी आपूर्ति, बिक्री के लिए नहीं”। यह साफ संकेत था कि इन दवाओं को अवैध रूप से बाजार में बेचा जा रहा था।
डेढ़ साल से चल रहा था गोरखधंधा
गिरफ्तार आरोपी नीरज कुमार ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह पिछले एक से डेढ़ साल से इस अवैध सप्लाई चेन को चला रहा था। वह अस्पतालों से दवाएं निकालकर दलालों के जरिए अलग-अलग शहरों में सप्लाई करता था, जिससे बड़ा मुनाफा कमाया जा रहा था।
अस्पताल के अंदर से हो रही थी सेटिंग
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस पूरे खेल में अस्पताल के अंदर के लोग भी शामिल थे।दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के फार्मासिस्ट-सह-स्टोरकीपर और एक संविदा कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया है। इन पर आरोप है कि ये लोग रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दवाओं को स्टॉक से बाहर निकालते थे।
UPI पेमेंट और कमीशन का पूरा सिस्टम
जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क में एक तय सिस्टम काम कर रहा था। दवाओं की निकासी से लेकर उनकी डिलीवरी और भुगतान तक सब कुछ प्लानिंग के तहत किया जाता था। संविदा कर्मचारी बिचौलिए के रूप में काम करता था और कमीशन के बदले UPI के जरिए लेनदेन संभालता था।
पुलिस की नजर अब पूरे नेटवर्क पर
क्राइम ब्रांच अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और इसमें और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
मुफ्त इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं का इस तरह काला बाज़ार में पहुंचना न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम मरीजों के हक पर भी सीधा हमला है। अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में कितनी सख्ती आती है।



