फरीदाबाद (गुरुग्राम), संवाददाता https://dhadkannews.com: हरियाणा के फरीदाबाद में चल रहे विश्वप्रसिद्ध सूरजकुंड मेला 2026 में शनिवार शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने मेले की रौनक को मातम में बदल दिया। शाम करीब 6 बजे मेले में लगा एक झूला अचानक तकनीकी खराबी के चलते टूटकर नीचे गिर गया। हादसे के समय झूले पर 26 लोग सवार थे, जबकि आसपास भी भारी भीड़ मौजूद थी। झूला गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
इसी अफरातफरी के बीच ड्यूटी पर तैनात हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद बिना अपनी जान की परवाह किए घायलों को बचाने के लिए दौड़ पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, राहत कार्य के दौरान झूले का एक हिस्सा दूसरी बार टूटकर उनके ऊपर गिर गया। गंभीर रूप से घायल इंस्पेक्टर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनका यह साहसिक कदम अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
12 घायल, मेला ग्राउंड कराया गया खाली
इस हादसे में 12 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज निजी अस्पतालों और बादशाह खान सिविल अस्पताल में चल रहा है। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियातन मेला ग्राउंड को खाली करा दिया और झूला क्षेत्र को सील कर दिया गया। हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें झूले के गिरने का भयावह मंजर साफ देखा जा सकता है।
शहीद का दर्जा, 1 करोड़ मुआवजा
इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की शहादत को सम्मान देते हुए हरियाणा सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा देने की घोषणा की है। जिला उपायुक्त अजय सिंघल ने बताया कि शहीद इंस्पेक्टर के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी मिलेगी। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हादसे में घायल प्रत्येक व्यक्ति को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
SIT करेगी जांच, जिम्मेदारी तय होगी
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—झूला कैसे टूटा? सुरक्षा मानकों की जांच कब हुई? और आखिर जिम्मेदार कौन है? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए एसीपी क्राइम वरुण दहिया के नेतृत्व में एक एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है। इस टीम में क्राइम ब्रांच प्रभारी, एनआईटी के एसआई शीशपाल और एसआई संजय शामिल हैं। एसआईटी की निगरानी डीसीपी क्राइम मुकेश मल्होत्रा करेंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हादसा या लापरवाही?
सूरजकुंड जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में इस तरह की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या झूले की तकनीकी जांच सही ढंग से हुई थी? क्या क्षमता से ज्यादा लोगों को झूले पर बैठाया गया? या फिर रखरखाव में लापरवाही बरती गई?
एक ओर जहां इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद का बलिदान पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गया है, वहीं दूसरी ओर यह हादसा सिस्टम की उन खामियों को उजागर कर गया है, जिनकी कीमत किसी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। अब सबकी नजरें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—ताकि यह साफ हो सके कि यह सिर्फ एक हादसा था या किसी की लापरवाही का नतीजा।



