जयपुर, संवाददाता https://dhadkannews.com: कोटा में शनिवार देर शाम गिरी तीन मंजिला इमारत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई गंभीर सवालों का केंद्र बन चुकी है। जवाहर थाना क्षेत्र में स्थित निर्माणाधीन बिल्डिंग का ढहना सीधे तौर पर निर्माण सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है।
हादसे के समय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मुरादाबादी नॉन वेज रेस्टोरेंट चल रहा था। सवाल यह है कि जब बिल्डिंग पूरी तरह तैयार भी नहीं थी, तब उसमें व्यावसायिक गतिविधियां किसकी अनुमति से चल रही थीं?
🟠 जेसीबी की खुदाई या लापरवाह निर्माण?
स्थानीय लोगों का दावा है कि हादसे से ठीक पहले पास की एक अन्य बिल्डिंग में जेसीबी मशीन से खुदाई का काम चल रहा था। आशंका जताई जा रही है कि भारी मशीनों से हुई कंपन ने कमजोर ढांचे को गिरा दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या खुदाई से पहले स्ट्रक्चरल सेफ्टी का आकलन किया गया था? क्या निर्माण स्थल के आसपास सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था?
🔵 अधूरी इमारत में कैसे चल रहा था रेस्टोरेंट?
जानकारी के अनुसार, इमारत की केवल दो मंजिलें बनी थीं और तीसरी मंजिल पर काम जारी था। इसके बावजूद नीचे रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा था। यह सीधे तौर पर नगर निगम, बिल्डिंग अप्रूवल विभाग और फायर सेफ्टी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है। बड़ा सवाल, क्या भवन उपयोग की अनुमति (Occupancy Certificate) ली गई थी? क्या निरीक्षण कभी किया गया?
🟡 प्रशासन मौके पर, लेकिन जवाबदेही बाद में?
हादसे के बाद शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी जिला प्रशासन को त्वरित रेस्क्यू और इलाज के निर्देश दिए। हालांकि, अब लोगों की मांग है कि सिर्फ राहत नहीं, बल्कि जिम्मेदारों की पहचान और सख्त कार्रवाई भी हो।
🔴 कलेक्टर का बयान और आगे की जांच
जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया के अनुसार, अब तक सात लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल भेजा गया है। मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन ने जांच के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन सवाल यही है—
👉 क्या यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होगी?
⚠️ कोचिंग हब में खतरे की घंटी
यह इलाका मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह हादसा भविष्य में बड़े खतरे की चेतावनी भी है। यदि निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर समय रहते सख्ती नहीं हुई, तो ऐसे हादसे दोहरा सकते हैं।



