Monday, June 15, 2026
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राजधानी की शान या लापरवाही की पहचान? इंडिया गेट के गंदे पानी ने खोली सरकारी दावों की पोल

ज्योति सिंह

नई दिल्ली, https://dhadkannews.com/ : एक तरफ केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन देश की राजधानी को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के दावे करते हैं, दूसरी तरफ देश की आन-बान-शान माने जाने वाले इंडिया गेट की तस्वीरें उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। धड़कन न्यूज़ की टीम द्वारा मौके पर ली गई तस्वीरों में इंडिया गेट के जलाशय का पानी हरा पड़ता, काई से ढका और कचरे से भरा दिखाई दे रहा है।

हैरानी की बात यह है कि इस गंदे पानी के बीच रोजाना हजारों लोग घूमने आते हैं, बच्चे खेलते हैं और कई पर्यटक उसी पानी में पैर डालकर बैठ जाते हैं। सवाल यह है कि क्या राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल पर लोगों की सेहत की कोई चिंता नहीं है?

विकास के दावों के बीच बदहाल हकीकत

सरकार स्वच्छता अभियान, स्मार्ट सिटी और विश्वस्तरीय सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन इंडिया गेट के जलाशय की स्थिति उन दावों को चुनौती देती नजर आती है। तस्वीरों में पानी की सतह पर जमी मोटी काई, तैरती प्लास्टिक बोतलें और हरा होता पानी साफ दिखाई देता है।

यदि देश और दुनिया से आने वाले पर्यटक राजधानी के प्रतिष्ठित स्थल पर ऐसी तस्वीरें देखेंगे तो भारत की छवि पर क्या असर पड़ेगा, यह सवाल भी खड़ा होता है।

क्या किसी बड़े हादसे या बीमारी का इंतजार है?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोग इस पानी के सीधे संपर्क में आ रहे हैं। बच्चे और युवा पानी में पैर डालकर बैठते नजर आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक गंदा और ठहरा हुआ पानी संक्रमण, त्वचा रोग और मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है।

इसके बावजूद न तो कहीं चेतावनी बोर्ड दिखाई देते हैं और न ही लोगों को पानी में उतरने से रोकने की कोई प्रभावी व्यवस्था नजर आती है।

करोड़ों खर्च, लेकिन रखरखाव पर सवाल

इंडिया गेट और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। लेकिन अगर जलाशयों का पानी ही हरा और गंदा हो जाए तो यह रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई और निगरानी नियमित होनी चाहिए ताकि ऐसी स्थिति पैदा ही न हो। आखिर राजधानी के सबसे संवेदनशील और वीआईपी इलाके में यदि यह हाल है तो बाकी जगहों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

“Dhadkan News” के सवाल

क्या इंडिया गेट के जलाशयों की नियमित सफाई हो रही है?

पानी की गुणवत्ता की आखिरी बार जांच कब हुई?

पर्यटकों को गंदे पानी में पैर डालकर बैठने से रोकने के लिए क्या इंतजाम हैं?

स्वच्छता के दावों के बीच यह बदहाल तस्वीर आखिर किसकी जिम्मेदारी है?

“Dhadkan News” द्वारा ली गई तस्वीरें केवल गंदे पानी की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि राजधानी की चमक-दमक के पीछे रखरखाव की कितनी बड़ी चुनौती छिपी हुई है। सरकार और संबंधित एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर देश की पहचान माने जाने वाले इंडिया गेट पर यह स्थिति क्यों बनी हुई है।

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