नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : देश की राजधानी दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा का मिजाज खतरनाक होता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि राजधानी की फिजा में घुला प्रदूषण अब महज असुविधा नहीं, बल्कि लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बुधवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 377 दर्ज किया गया। यह इस साल 20 जनवरी के बाद का सबसे खराब स्तर है। यानी करीब 288 दिनों बाद दिल्ली की हवा एक बार फिर इतने जहरीले स्तर तक पहुंच गई है।
सबसे चिंताजनक तस्वीर IIT दिल्ली से सामने आई, जहां AQI 458 तक पहुंच गया। वहीं जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में 448 तथा मुंडका में 439 का स्तर दर्ज किया गया। दिल्ली के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 22 पर हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली की हवा में जहर घोल रहे कौन-कौन से कारक?
प्रदूषण की इस स्थिति के पीछे केवल एक वजह नहीं, बल्कि कई स्रोत एक साथ जिम्मेदार नजर आ रहे हैं। IITM पुणे की डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 20.2 प्रतिशत रहा। इसके बाद परिवहन क्षेत्र यानी वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी 15.5 प्रतिशत दर्ज की गई।
इससे साफ है कि खेतों में जलती पराली का धुआं और राजधानी की सड़कों पर दौड़ते वाहनों का उत्सर्जन मिलकर दिल्ली की हवा को और जहरीला बना रहे हैं।
कहां कितना खतरनाक रहा AQI?
बुधवार को राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर इस प्रकार दर्ज किया गया:
- IIT दिल्ली – 458
- जहांगीरपुरी – 448
- पंजाबी बाग – 448
- मुंडका – 439
- दिल्ली का औसत AQI – 377
तीन दिन बाद बदला प्रदूषण का चेहरा, अब PM10 बना प्रमुख प्रदूषक
दिल्ली के प्रदूषण में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है। लगातार तीन दिनों तक PM2.5 प्रमुख प्रदूषक बना हुआ था, लेकिन बुधवार को PM10 ने उसकी जगह ले ली।
PM10 के बढ़ते स्तर के पीछे मुख्य रूप से सड़कों, निर्माण स्थलों और खुले इलाकों से उड़ने वाली धूल को जिम्मेदार माना जाता है। इसका मतलब है कि प्रदूषण की लड़ाई अब केवल वाहनों और पराली तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण गतिविधियों और धूल नियंत्रण पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
NCR के पड़ोसी जिले भी बढ़ा रहे दिल्ली की परेशानी
दिल्ली की हवा पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के आसपास के जिलों का असर भी दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में गाजियाबाद का योगदान 7 प्रतिशत रहा। इसके बाद रोहतक, गुरुग्राम और सोनीपत का स्थान रहा।
यह स्थिति बताती है कि दिल्ली के प्रदूषण को केवल राजधानी की सीमा के भीतर रहकर नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। इसके लिए पूरे NCR में समन्वित और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
तापमान में गिरावट, लेकिन हवा में राहत नहीं
बुधवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.7 डिग्री कम था। वहीं न्यूनतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक था। हवा में नमी का स्तर 61 से 98 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया।
मौसम में बदलाव के बावजूद प्रदूषण का बढ़ता स्तर राजधानी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अब सवाल कार्रवाई का है, सिर्फ आंकड़ों का नहीं!
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण का संकट गहराता है। पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण स्थलों की धूल और NCR से आने वाले प्रदूषण के बीच आम नागरिक साफ हवा के इंतजार में रहता है।
288 दिनों का रिकॉर्ड टूटना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के मौजूदा प्रयासों पर भी सवाल खड़ा करता है। जरूरत इस बात की है कि प्रदूषण के हर स्रोत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो, क्योंकि साफ हवा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है।
अब सवाल यही है—क्या दिल्ली को इस बार जहरीली सर्दियों से बचाने के लिए ठोस कदम उठेंगे या राजधानी एक बार फिर धुएं के हवाले रहेगी?



