नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : जिस वर्दी पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, उसी वर्दी की आड़ में अगर किसी कारोबारी को अगवा करने और फिरौती मांगने के आरोप सामने आएं, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही पर भी उठते हैं। दिल्ली पुलिस के उत्तर जिला साइबर सेल में तैनात सिपाही मोईन अली पर अपहरण और फिरौती से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और विभाग ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मोईन अली वर्ष 2024 बैच का सिपाही है और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का निवासी बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने पुलिसकर्मी होने का रौब दिखाकर एक घड़ी कारोबारी को निशाना बनाया और उसे जबरन दिल्ली से गुरुग्राम ले गया।
रामलीला की सुरक्षा ड्यूटी, लेकिन आरोपों के घेरे में सिपाही!
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी की ड्यूटी लाल किले पर आयोजित रामलीला मेले की सुरक्षा में लगी हुई थी। जिस समय उसे सार्वजनिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी थी, उसी दौरान उस पर कथित तौर पर एक कारोबारी को डराने और अगवा करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा।
जानकारी के अनुसार, मोईन अली ने एक घड़ी विक्रेता पर चोरी की घड़ी बेचने का आरोप लगाया। आरोप है कि इसी बहाने उसने कारोबारी पर दबाव बनाया और उसे जबरन गुरुग्राम ले गया। अब जांच का अहम सवाल यह है कि क्या पुलिस की पहचान और अधिकारों का इस्तेमाल कारोबारी को डराने के लिए किया गया?
गुरुग्राम से आई फिरौती की कॉल, खुलने लगी पूरी कहानी
मामला तब गंभीर हुआ, जब कारोबारी के परिचितों की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई। इसके बाद व्यापारी की रिहाई के बदले लाखों रुपये की फिरौती मांगे जाने की जानकारी सामने आई।
फिरौती की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और पीड़ित का पता लगाने के लिए विशेष टीम गठित की। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी सुरागों और सर्विलांस की मदद से कारोबारी की तलाश शुरू की। सुरागों का पीछा करते हुए पुलिस टीम गुरुग्राम पहुंची, जहां से मामले में कथित आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली।
अपराधी की तलाश में निकली पुलिस, सामने आया अपने ही विभाग का कर्मचारी!
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पुलिसकर्मियों को भी हैरान कर दिया। जिस व्यक्ति पर अपहरण और फिरौती में शामिल होने का आरोप था, वह कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस का ही सिपाही मोईन अली निकला।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और कारोबारी को सुरक्षित मुक्त करा लिया। इस कार्रवाई के बाद मामला महज अपहरण की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिसकर्मियों के आचरण, अधिकारों के कथित दुरुपयोग और विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े हो गए।
निलंबन की कार्रवाई, अब साजिश की पूरी कड़ियां तलाशेगी पुलिस
मामले के सामने आने के बाद विभाग ने आरोपी सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित वारदात में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। साथ ही, जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ सकती है कि आरोपी ने पहले कभी इसी तरह की घटना को अंजाम दिया था या नहीं।
हालांकि, मामले के सभी पहलुओं, फिरौती की रकम, कथित सहयोगियों और घटना की पूरी परिस्थितियों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, जवाबदेही भी है!
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि कानून लागू करने वाले हर व्यक्ति से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी पुलिसकर्मी पर ही अपने पद का दुरुपयोग कर नागरिक को डराने, अगवा करने या फिरौती मांगने जैसे आरोप लगते हैं, तो निष्पक्ष जांच और जवाबदेही और भी जरूरी हो जाती है।
अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं—क्या इस कथित साजिश में और चेहरे सामने आएंगे, और क्या जांच से यह स्पष्ट हो पाएगा कि वर्दी की आड़ में इस वारदात को किस तरह अंजाम दिया गया?



