Thursday, November 5, 2026
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‘जिस्म नहीं दिया, इसलिए पद नहीं मिला!’ BJP की महिला नेत्री ने फोड़ा सियासी बम, संगठन को बताया ‘कोठा’… कुशीनगर से लखनऊ तक हड़कंप!

कुशीनगर में पूनम जायसवाल की सोशल मीडिया पोस्ट से सियासी हलचल, संगठन की तुलना कोठे से कर उठाए गंभीर सवाल; मेहनत, आर्थिक योगदान और महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका पर छेड़ी बहस

लखनऊ, https://dhadkannews.com  : राजनीति में नारे, भाषण और मंचों से अक्सर महिलाओं के सम्मान की बातें होती हैं, लेकिन जब किसी महिला कार्यकर्ता को अपने ही संगठन में जगह नहीं मिलने की शिकायत सार्वजनिक मंच पर उठानी पड़े तो सवाल केवल एक पद का नहीं रह जाता, बल्कि संगठन की कार्यशैली और महिला कार्यकर्ताओं की वास्तविक भूमिका पर भी बहस शुरू हो जाती है।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भाजपा से जुड़ी बताई जा रहीं पूनम जायसवाल की एक फेसबुक पोस्ट ने इसी तरह की बहस को जन्म दे दिया है। पोस्ट में उन्होंने पार्टी संगठन के भीतर अपने अनुभवों को बेहद तीखी और विवादित भाषा में बयां किया है। उनका आरोप है कि पार्टी के लिए वर्षों तक मेहनत करने, निजी पैसे खर्च करने और तमाम शारीरिक परेशानियों के बावजूद उन्हें संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई।

सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस कथन की हो रही है, जिसमें उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपना ‘जिस्म नहीं दिया’, इसलिए उन्हें पद नहीं मिला। यह टिप्पणी अब संगठन के भीतर महिलाओं की भागीदारी, कथित पक्षपात और पदों के वितरण की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।

संगठन की तुलना कोठे से, कार्यकर्ताओं की मेहनत पर उठाए सवाल

पूनम जायसवाल ने अपनी पोस्ट में भाजपा संगठन की तुलना कोठे से करते हुए आरोप लगाया है कि वहां मेहनत और समर्पण के बजाय कुछ अन्य बातों को महत्व दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन कार्यकर्ताओं ने संगठन के लिए अपना समय, संसाधन और ऊर्जा लगाई, उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।

उनकी नाराजगी खास तौर पर महिला मोर्चा में अपनी भूमिका और मुख्य संगठन में जिम्मेदारी नहीं मिलने को लेकर है। पोस्ट में उन्होंने संगठन के भीतर कथित दबाव और पक्षपात का भी जिक्र किया है।

पैरालाइज्ड शरीर का हवाला, फिर भी नहीं मिली जिम्मेदारी!

पूनम जायसवाल ने अपनी पोस्ट में अपने शारीरिक संघर्ष का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि पैरालाइज्ड शरीर और तमाम व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पार्टी के लिए काम करना जारी रखा।

उन्होंने लिखा कि कई बार भूखे-प्यासे रहकर कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और अपनी जेब से पैसे खर्च किए। इसके बावजूद जब संगठन में जिम्मेदारी देने की बारी आई तो उनकी मेहनत को नजरअंदाज कर दिया गया।

अब लखनऊ तक पहुंचेगा मामला, संगठन के सामने सवाल

पूनम जायसवाल ने अपनी पोस्ट में इस पूरे मामले को लखनऊ में उठाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ टिप्पणी करने वालों को भी चेतावनी दी है।

इस प्रकरण पर मीडिया रिपोर्टों में उनके आरोपों से जुड़ा वीडियो वायरल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, लगाए गए गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। भाजपा के आधिकारिक पक्ष और संगठन की ओर से किसी औपचारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी भी सामने आना बाकी है।

भाजपा संगठन के सामने बड़ा सवाल

यह मामला अब केवल एक महिला नेत्री की नाराजगी तक सीमित नहीं रह गया है। इसके जरिए कुछ बुनियादी सवाल भी उठ रहे हैं:

  • क्या राजनीतिक दलों में वर्षों तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उनकी मेहनत के अनुरूप जिम्मेदारी मिलती है?
  • महिला मोर्चा में सक्रिय महिलाओं को मुख्य संगठन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल रहा है?
  • क्या संगठन में पदों का वितरण पारदर्शी प्रक्रिया से होता है?
  • यदि किसी कार्यकर्ता के आरोप निराधार हैं तो संगठन सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?
  • और यदि आरोपों में सच्चाई है, तो उनकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही कौन तय करेगा?

सवाल तीखा है, लेकिन जवाब जरूरी है। महिला सशक्तीकरण और कार्यकर्ता सम्मान की बात करने वाले किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए जरूरी है कि ऐसे आरोपों को केवल अनुशासनहीनता या व्यक्तिगत नाराजगी बताकर नजरअंदाज न किया जाए। आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सामने आए।

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