लखनऊ, https://dhadkannews.com : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। कथित धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों को निशाना बनाए जाने के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने संस्थान के प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यूपी के गृह विभाग ने एसटीएफ की रिपोर्ट की प्रति केजीएमयू प्रशासन को भेजकर संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा है।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कथित तौर पर ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से संचालित नेटवर्क की हो रही है। एसटीएफ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस नेटवर्क के जरिए मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने और काम करने वाले कुछ लोगों को संगठित किया जाता था। आरोप है कि व्हाट्सएप ग्रुप, मैगजीन और बुकलेट के माध्यम से एक विशेष विचारधारा का प्रचार किया जाता था और हिंदू महिला डॉक्टरों को निशाना बनाने की कोशिश की जाती थी।
हालांकि, रिपोर्ट में दर्ज आरोपों और जांच के निष्कर्षों को न्यायिक रूप से साबित तथ्यों से अलग समझना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी संबंधित साक्ष्यों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
डॉ. रमीज को लेकर रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा
एसटीएफ रिपोर्ट में केजीएमयू के पूर्व रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. रमीज ने कथित तौर पर अपने एक दोस्त से बातचीत के दौरान 19 हिंदू लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने का दावा किया था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉ. रमीज को मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। केजीएमयू प्रशासन की ओर से भी उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू किए जाने का उल्लेख है। इस दावे की गंभीरता को देखते हुए जांच में सामने आए तथ्यों और संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
व्हाट्सएप ग्रुप से मेडिकल कॉलेजों तक नेटवर्क फैलने का आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से कथित तौर पर एक ऐसा नेटवर्क संचालित हो रहा था, जिसकी गतिविधियां उत्तर प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों तक फैली हुई थीं।
एसटीएफ का दावा है कि इस नेटवर्क के संचालन के लिए डिजिटल और प्रिंट माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था। नए मुस्लिम मेडिकल छात्रों को इस नेटवर्क से जोड़ने और उन्हें धार्मिक गतिविधियों के लिए संगठित करने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में एसएनएमसी आगरा और केजीएमयू से जुड़े कई लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में इन नामों का भी जिक्र
एसटीएफ रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों में निम्न नाम शामिल हैं:
- एसएनएमसी आगरा के पासआउट मो. कैफ।
- केजीएमयू से जुड़े मो. एहसान।
- अमन मलिक।
- शदन शमीम।
- मो. अयान।
- मो. जहीर।
- मो. अमन।
- शाबिर खान।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ लोगों के हिंदू महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ करीबी संबंध थे और उन्हें इस्लामिक विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की गई थी। इन नामों का रिपोर्ट में उल्लेख होना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आरोपों की स्वतंत्र जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
12 कर्मचारियों के नाम, महिला प्रोफेसर पर भी आरोप
इस मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू केजीएमयू में वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों से जुड़ा है। एसटीएफ रिपोर्ट में कथित तौर पर 12 लोगों के नाम होने की बात सामने आई है। इन पर संस्थान में धर्म के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में एक महिला प्रोफेसर का भी जिक्र है। उन पर कथित तौर पर ‘इस्लामिक मेडिकोज’ से जुड़े लोगों को समर्थन देने का आरोप है।
अब गृह विभाग की ओर से रिपोर्ट केजीएमयू प्रशासन को भेजे जाने के बाद संस्थान के भीतर विभागीय जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।
सरकार के निर्देश के बाद KGMU प्रशासन की भूमिका अहम
एसटीएफ रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग की कार्रवाई के निर्देशों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब सवाल यह है कि केजीएमयू प्रशासन रिपोर्ट में दर्ज प्रत्येक आरोप की जांच किस तरह करता है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
मामला केवल एक मेडिकल संस्थान की आंतरिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसमें महिला डॉक्टरों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर समानता, संस्थागत जवाबदेही और मेडिकल शिक्षा के माहौल से जुड़े गंभीर सवाल भी शामिल हैं।
अब सबकी नजरें केजीएमयू प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



