नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : सोशल मीडिया पर चमकती लग्जरी कारें, महंगी लाइफस्टाइल और रसूखदार शख्सियत की तस्वीरें—कभी-कभी यही आभासी दुनिया किसी बड़े धोखाधड़ी के खेल का पर्दा भी बन सकती है। दिल्ली पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल शिवानी से कथित तौर पर 24 लाख रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार विक्रांत कुमार उर्फ विक्की तोमर की जांच ने ऐसे ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी पर सोशल मीडिया के जरिए महिला पुलिसकर्मियों से नजदीकियां बढ़ाने, खुद को प्रभावशाली क्रिकेटर और कारोबारी के रूप में पेश करने तथा शादी का झांसा देकर पैसे ऐंठने के आरोप हैं। जांच में करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों को निशाना बनाए जाने की आशंका सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ठगी का दायरा दिल्ली तक सीमित था या दूसरे राज्यों में भी ऐसे मामले हुए हैं।
सोशल मीडिया पर रुतबा, असल जिंदगी में किराये की लग्जरी कारें?
जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बागपत का रहने वाला 26 वर्षीय विक्रांत कथित तौर पर दिल्ली-एनसीआर में किराये पर महंगी गाड़ियां लेकर उनके साथ वीडियो और रील बनाता था। इन वीडियो के जरिए वह सोशल मीडिया पर अपनी आर्थिक हैसियत और रसूख का प्रभाव पैदा करने की कोशिश करता था।
आरोप है कि इसी दिखावे के सहारे वह महिला पुलिसकर्मियों से संपर्क बढ़ाता और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतता था। पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपी ने अलग-अलग महिलाओं से बातचीत के दौरान किस तरह की पहचान और कहानियों का इस्तेमाल किया। यह मामला एक बार फिर सवाल उठाता है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली संपन्नता और वास्तविक आर्थिक स्थिति के बीच अंतर को पहचानना कितना मुश्किल हो सकता है।
एक ही बैच की महिला कॉन्स्टेबलें कैसे बनीं निशाना?
मामले का सबसे अहम पहलू आरोपी की कथित कार्यप्रणाली है। पुलिस के मुताबिक, विक्रांत की लिव-इन पार्टनर भी दिल्ली पुलिस में महिला कॉन्स्टेबल है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि आरोपी ने पार्टनर के मोबाइल फोन और दस्तावेजों के माध्यम से उसकी बैच की दूसरी महिला कर्मियों से संबंधित जानकारी हासिल की।
आरोप है कि इसके बाद उसने इंस्टाग्राम पर इन महिला कॉन्स्टेबलों से संपर्क साधा। शुरुआती बातचीत में खेल कोटे से भर्ती जैसे विषयों पर चर्चा कर परिचय बढ़ाने और फिर निजी रिश्ते बनाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में जानकारी किस तरह हासिल की गई, किसी की निजी जानकारी का दुरुपयोग हुआ या नहीं और अन्य लोगों की भूमिका क्या थी—इन सवालों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
₹24 लाख की ठगी और ऑनलाइन सट्टेबाजी का कनेक्शन
पुलिस जांच में आरोपी के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े लेन-देन भी सामने आने की बात कही गई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिवानी से कथित तौर पर ठगे गए 24 लाख रुपये में से लगभग 8 लाख रुपये सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से जुड़े खातों तक पहुंचने का संदेह है। अन्य महिला कॉन्स्टेबलों से कथित रूप से प्राप्त रकम के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, मोबाइल डेटा और संबंधित प्लेटफॉर्म से जुड़े लेन-देन की कड़ियां जोड़ रही है। फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम कहां से आई, किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।
आखिर क्या है ‘रिकी बहल’ वाला पैटर्न?
‘रिकी बहल’ नाम साल 2011 की फिल्म लेडीज वर्सेस रिकी बहल से लोकप्रिय हुआ। आम बोलचाल में इसका इस्तेमाल ऐसे कथित ठग के लिए किया जाता है, जो आकर्षक व्यक्तित्व, झूठे वादों, प्रभावशाली पहचान या प्रेम और शादी के भरोसे के जरिए लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है।
इस मामले में भी पुलिस का आरोप है कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर बनाई गई छवि और निजी रिश्तों का इस्तेमाल करके महिलाओं का भरोसा हासिल किया। हालांकि, फिल्म से जुड़ा यह लोकप्रिय शब्द अपने आप में किसी अपराध का कानूनी प्रमाण नहीं है; मामले में आरोपों का निर्धारण साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
सोशल मीडिया की चमक के पीछे छिपे खतरे
यह मामला केवल कथित आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल पहचान, निजी जानकारी की सुरक्षा और ऑनलाइन रिश्तों में भरोसे से जुड़े जोखिमों की ओर भी ध्यान खींचता है।
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि ऑनलाइन परिचय के आधार पर किसी व्यक्ति की आर्थिक हैसियत को सच न मानें, शादी या रिश्ते के नाम पर पैसे भेजने से पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापन करें और बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या निजी दस्तावेज साझा करने से बचें।
इंस्टाग्राम की चमकदार तस्वीरें किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान की गारंटी नहीं होतीं। दिल्ली पुलिस की इस जांच में अब सबसे अहम सवाल यही है कि कथित ठगी का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है, कितनी महिलाएं प्रभावित हुईं और डिजिटल साक्ष्य इस मामले में किन नई कड़ियों को उजागर करते हैं। फिलहाल, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।



