नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया है। पति की हत्या और उसके शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने के मामले में दोषी ठहराई गई मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही उस सनसनीखेज मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
30 सितंबर को अदालत ने दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा की अवधि तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। बुधवार, 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों दोषियों के लिए फांसी की सजा सुनाई। दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हुए।
माता-पिता ने भी कहा—सौरभ के साथ हुआ अन्याय
इस मामले में मुस्कान के माता-पिता का रुख भी चर्चा में रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अदालत में लिखित बयान देकर सौरभ को अच्छा इंसान बताया और उसकी बेरहमी से हुई हत्या पर दुख जताया। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्कान को मृत्युदंड दिए जाने पर उन्हें आपत्ति नहीं होगी।
परिवार की ओर से सामने आया यह रुख मामले के भावनात्मक पहलू को उजागर करता है। हालांकि, उनके लिखित बयान के सटीक शब्दों और अदालत में दर्ज विवरण की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
सौरभ की मां और परिवार के लिए यह मुकदमा केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपने बेटे को खोने के बाद इंसाफ की लंबी प्रतीक्षा भी रहा है।
क्या है पूरा नीले ड्रम वाला हत्याकांड?
यह मामला 3 मार्च 2025 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर की थी। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपा दिया गया।
जब इस वारदात का खुलासा हुआ, तो हत्या के तरीके ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। मामला देखते ही देखते देशभर में चर्चा का विषय बन गया। नीला ड्रम इस हत्याकांड की पहचान बन गया और पुलिस जांच में शव को छिपाने के कथित प्रयास की अहम भूमिका रही।
126 सुनवाई के बाद आया फैसला
इस मुकदमे की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। 30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने 126 सुनवाइयों के बाद मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी।
दोषसिद्धि के बाद अदालत ने दोनों को अपनी सजा के संबंध में पक्ष रखने का अवसर दिया। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा सुनाई गई।
क्या संदेश देता है अदालत का फैसला?
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने एक बार फिर हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराधों पर बहस छेड़ दी है। अदालत का मृत्युदंड संबंधी फैसला मामले की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में लागू कानूनी प्रक्रिया और आगे की अपीलों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में आए इस फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी। मामले से जुड़े आधिकारिक आदेश और अपील की स्थिति सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।



