ईरान: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान अब सिर्फ बाहरी मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अंदरूनी खींचतान से भी जूझ रहा है। एक महीने से जारी जंग का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, लेकिन सत्ता के गलियारों में दरारें साफ दिखने लगी हैं।
⚡ सत्ता के दो धड़े आमने-सामने
राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के शीर्ष नेतृत्व के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ रहा है।जहां राष्ट्रपति युद्धविराम (सीजफायर) की वकालत कर रहे हैं, वहीं IRGC संघर्ष को जारी रखने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पेजेश्कियान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द सीजफायर नहीं हुआ, तो देश की अर्थव्यवस्था कुछ ही हफ्तों में पूरी तरह चरमरा सकती है।
💣 ‘हमले रोकें’ बनाम ‘जंग जारी रखें’
राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों पर हो रहे हमलों को लेकर IRGC के रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पहले भी इन हमलों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया था, लेकिन जमीनी हकीकत में बदलाव नहीं दिख रहा। वहीं IRGC ने पलटवार करते हुए मौजूदा हालात के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।
🏛️ पावर स्ट्रगल: किसके हाथ में कमान?
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ने मांग की है कि युद्ध से जुड़े फैसलों की कार्यकारी शक्ति सरकार को दी जाए।लेकिन IRGC नेतृत्व ने इसे सिरे से खारिज कर दिया—यानी सत्ता के भीतर ‘कौन तय करेगा रणनीति’ पर सीधा संघर्ष।
📉 अर्थव्यवस्था पर युद्ध का कहर
जंग से पहले ही आर्थिक संकट झेल रहा ईरान अब और गहरे दलदल में फंसता दिख रहा है:
- कई शहरों में ATM खाली
- बैंकिंग सिस्टम प्रभावित
- सरकारी कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं
- महंगाई दर 100% के पार
ये हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि युद्ध अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं, बल्कि आम जनता की जिंदगी को भी तोड़ रहा है।
🌍 वैश्विक नजरें और अंदरूनी अस्थिरता
The Times of Israel की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के अधिकारियों को ईरान की सत्ता में दरार के संकेत मिल रहे हैं—जिसे वे रणनीतिक मौके के तौर पर देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, ईरान इस समय दो मोर्चों पर लड़ रहा है—एक बाहरी दुश्मनों से और दूसरा अपने ही सिस्टम के भीतर। कई बार इतिहास गवाह है, अंदरूनी दरारें ही सबसे बड़ी हार की वजह बनती हैं।



