Thursday, April 16, 2026
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गठबंधन की राजनीति या सत्ता की रणनीति? नीतीश के इस्तीफे पर सवाल

निर्विघ्न सिंह

नेशनल ब्यूरो, https://dhadkannews.com: नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब संसद के उच्च सदन राज्यसभा में जाने की इच्छा जताई है। सामने आई रिपोर्टों के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

करीब दो दशक तक बिहार की राजनीति का केंद्रीय चेहरा रहे नीतीश कुमार का यह कदम राज्य की सत्ता संरचना में एक बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह केवल पद परिवर्तन नहीं बल्कि उस राजनीतिक दौर का संभावित अंत भी माना जा रहा है जिसमें लंबे समय तक सरकार का चेहरा लगभग स्थिर रहा।

क्या बदल सकती है सत्ता की दिशा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के हटने से बिहार की राजनीति में शक्ति संतुलन नए तरीके से तय हो सकता है। क्योंकि वर्तमान सरकार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) का गठबंधन है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का संगठनात्मक और राजनीतिक प्रभाव राज्य में काफी बढ़ा है। इसी वजह से अब यह चर्चा भी तेज है कि क्या बिहार में भी वही राजनीतिक पैटर्न देखने को मिलेगा, जो पिछले कुछ वर्षों में अन्य राज्यों में सामने आया था।

पहले भी बदले सत्ता के समीकरण

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ‘भारतीय जनता पार्टी’ ने पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदलकर सत्ता अपने हाथ में ली है।

  • मध्यप्रदेश (2020): कांग्रेस सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर विधायकों के इस्तीफे के बाद सरकार गिर गई। इसके बाद भाजपा ने सरकार बनाई और शिवराज सिंह चौहान फिर से मुख्यमंत्री बने।
  • कर्नाटक (2019): कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार विधायकों के इस्तीफे के बाद गिर गई और भाजपा ने सरकार बनाकर बी.एस. यदुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाया।
  • महाराष्ट्र (2022): शिवसेना में बड़े राजनीतिक विद्रोह के बाद सत्ता समीकरण बदले और Eknath Shinde मुख्यमंत्री बने, जबकि भाजपा सत्ता का अहम हिस्सा बन गई।
  • गोवा (2019): कांग्रेस के कई विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई और भाजपा की स्थिति मजबूत हुई।

बिहार के लिए इसका क्या मतलब

बिहार में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री पद किसके पास रहेगा। यदि जदयू इस पद को बनाए रखती है तो गठबंधन की मौजूदा संरचना कायम रह सकती है, लेकिन अगर भाजपा नेतृत्व की भूमिका चाहती है तो राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

आगे की राह

नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाना उनके राजनीतिक करियर का नया चरण माना जा रहा है। वहीं बिहार में यह फैसला आने वाले समय में सत्ता के नए समीकरणों और नेतृत्व की नई पीढ़ी के उभरने का रास्ता भी खोल सकता है।

फिलहाल नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और गठबंधन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

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