कानपुर,विधि संवाददाता: https://dhadkannews.com: अदालत का फैसला आ चुका है, लेकिन न्याय का दर्द अभी बाकी है। बहुचर्चित कुशाग्र अपहरण और हत्याकांड में जिला अदालत ने गुरुवार को ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी आर्यन उर्फ शिवा को दोषी करार देते हुए मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई।
फैसला सुनते ही जहां कोर्ट में सन्नाटा छा गया, वहीं पीड़ित परिवार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके लिए यह फैसला सजा से ज्यादा अधूरा न्याय बनकर रह गया।
- लालच की साजिश, मासूम की जान
अदालत में अभियोजन ने बताया कि 30 अक्टूबर 2023 को कुशाग्र का अपहरण 30 लाख रुपये की फिरौती के लिए किया गया था। मासूम छात्र की अपनी ही ट्यूशन टीचर ने विश्वास तोड़ते हुए यह खौफनाक साजिश रची।
जब आरोपियों को गिरफ्तारी का डर सताने लगा, तो उन्होंने बच्चे की निर्मम हत्या कर दी।
- सबूतों ने खोले राज
पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान अहम कड़ी साबित हुए। इन्हीं ठोस सबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और कोर्ट में मामला मजबूत रूप से पेश किया गया।
- ‘यह सिर्फ हत्या नहीं, भरोसे का कत्ल है’
फैसला सुनाते हुए अदालत ने इस अपराध को जघन्यतम श्रेणी का बताया। न्यायालय ने कहा कि यह सिर्फ एक बच्चे की हत्या नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य के विश्वास और समाज की नैतिकता पर हमला है। कोर्ट ने तीनों को आईपीसी की धारा 364A और 302 के तहत दोषी ठहराया।
- मां की चीखें, अदालत का सन्नाटा
फैसले के बाद कुशाग्र की मां सुनीता अदालत में ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा, “जिस दर्द से मेरा बेटा गुजरा, उसके सामने उम्रकैद कुछ भी नहीं। हमें इंसाफ तब मिलेगा, जब दोषियों को फांसी होगी।”
- हाईकोर्ट में जाएगी लड़ाई
परिवार ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले से संतुष्ट नहीं है और हाईकोर्ट में अपील करेगा। उनका कहना है कि जब तक दोषियों को मृत्युदंड नहीं मिलेगा, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
इस फैसले ने कानून की मजबूती तो दिखाई, लेकिन यह भी जता दिया कि कुछ जख्म ऐसे होते हैं, जिन्हें कोर्ट के आदेश भी भर नहीं पाते।



