लखनऊ,https://dhadkannews.com : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होने से पहले आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा आठ साल पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। गाजियाबाद की MP-MLA विशेष अदालत ने 2018 के एक कथित मारपीट मामले में चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। अदालत की कार्रवाई उनकी सुनवाई में गैरहाजिरी के बाद हुई है।
मामला सिर्फ वारंट तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत में उनकी लगातार गैरहाजिरी को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष ने धारा 82 और 83 के तहत कार्रवाई की मांग की थी, जिसमें फरार आरोपी की उद्घोषणा और संपत्ति की कुर्की जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। रिपोर्टों में अदालत द्वारा संपत्ति जब्ती/कुर्की से जुड़ा आदेश दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
शादी समारोह से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा मामला वर्ष 2018 का है। साहिबाबाद थाना क्षेत्र स्थित वृंदावन गार्डन में एक शादी समारोह के दौरान कथित मारपीट को लेकर मामला दर्ज हुआ था।
शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार, जो गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के नूरपुर गांव के निवासी बताए जाते हैं, के अनुसार वह शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। उसी दौरान चंद्रशेखर आजाद अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। धर्मेंद्र के आरोप के मुताबिक, चंद्रशेखर के साथ हथियारबंद लोगों को देखकर उन्होंने सवाल किया कि इतने हथियार क्यों लाए गए हैं। इसके बाद कथित तौर पर विवाद बढ़ा और चंद्रशेखर आजाद, गुलजार सिद्दीकी, पंकज जाटव समेत अन्य लोगों पर गाली-गलौज और मारपीट करने का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता ने जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया था।
पहले भी कोर्ट पहुंच चुके हैं चंद्रशेखर
इस मामले में चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ पहले भी वारंट जारी हो चुका है। हालांकि, मई 2025 में वह अपने अधिवक्ता के साथ गाजियाबाद की MP-MLA विशेष अदालत में पेश हुए थे और वारंट रिकॉल कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। अदालत ने उस समय उनकी अर्जी पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख तय की थी।
अब गुरुवार की सुनवाई के दौरान उनकी गैरमौजूदगी के बाद अदालत ने फिर गैर-जमानती वारंट जारी किया है। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता भजनलाल गौतम ने अदालत में मामले की आगे की कार्रवाई को लेकर प्रार्थना पत्र भी दिया था।
आरोपों पर अंतिम फैसला अभी बाकी
यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए मारपीट और धमकी के आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होना है। उपलब्ध चुनावी हलफनामे के रिकॉर्ड में भी साहिबाबाद के Crime No. 3394/2018 के साथ IPC की धाराएं 147, 148, 149, 323 और 506 दर्ज हैं।
ऐसे में आठ साल पुराना यह मामला अब एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में है—खासकर ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति का माहौल धीरे-धीरे गरम हो रहा है।



