देहरादून, https://dhadkannews.com : मुंह में घुलने वाला गुटखा और पान मसाला अब उत्तराखंड में कानूनी कार्रवाई की वजह बन सकता है। राज्य सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गुटखा, पान मसाला और तंबाकू-निकोटिन युक्त खाद्य पदार्थों पर एक साल के प्रतिबंध का आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, इन उत्पादों के निर्माण से लेकर भंडारण, वितरण और बिक्री तक पर रोक लगाई गई है।
सिर्फ दुकान पर बिक्री नहीं, पूरी सप्लाई चेन पर शिकंजा
सरकार के आदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बन्धन) विनियम, 2011 का हवाला दिया गया है। इसके तहत तंबाकू या निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला और इस श्रेणी के अन्य खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। ये उत्पाद बाजार में किसी भी नाम से उपलब्ध हों, आदेश के दायरे में आ सकते हैं।
इस फैसले का दायरा केवल दुकानों तक सीमित नहीं है। इसमें चार प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं:
- निर्माण: प्रतिबंधित उत्पाद तैयार करने पर रोक।
- भंडारण: इन उत्पादों का स्टॉक रखने पर रोक।
- वितरण: बाजार या दुकानों तक पहुंचाने पर रोक।
- बिक्री: उपभोक्ताओं को बेचने पर रोक।
जनस्वास्थ्य को बताया गया फैसले का आधार
सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि जनस्वास्थ्य के हित में ऐसे उत्पादों पर रोक लगाना जरूरी है। तंबाकू और निकोटिन से जुड़े उत्पादों के सेवन को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच यह कदम उठाया गया है।
हालांकि, प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निगरानी, बाजार में उपलब्ध स्टॉक की जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना अहम होगा।
क्या हर तरह का पान मसाला प्रतिबंधित है?
इस आदेश की व्याख्या करते समय एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध विवरण में विशेष रूप से तंबाकू या निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला और संबंधित खाद्य पदार्थों का उल्लेख है। इसलिए बिना आधिकारिक अधिसूचना की पूरी भाषा देखे यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि हर प्रकार का तंबाकू-मुक्त पान मसाला भी प्रतिबंधित है।
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला राज्य में तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पादों की उपलब्धता पर व्यापक नियंत्रण की दिशा में कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंध को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।



