सिरमौर, हिमाचल प्रदेश : कहते हैं कि सच्चा जीवनसाथी वही होता है, जिसके साथ जीने-मरने की कसमें केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहतीं। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से सामने आई एक मार्मिक घटना ने इसी रिश्ते की गहराई को लेकर पूरे इलाके को भावुक कर दिया है। संगड़ाह उपमंडल के लगनू गांव में दशकों तक एक-दूसरे का साथ निभाने वाले मांगा राम और उनकी पत्नी हरदेवी की मौत के बीच महज 15 मिनट का अंतर रहा। सोमवार को जब दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं, तो हर आंख नम हो गई।
पति की मौत की खबर बनी आखिरी सदमा
78 वर्षीय मांगा राम पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनकी 70 वर्षीय पत्नी हरदेवी उम्र के इस पड़ाव पर भी घर के सामान्य कामकाज में सक्रिय रहती थीं। रविवार शाम तक सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही देर में परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।
जानकारी के अनुसार, जब हरदेवी को पति के अचेत होने का पता चला तो वह तुरंत उनके पास पहुंचीं और उन्हें पानी पिलाया। उस वक्त उन्हें शायद इस बात का एहसास भी नहीं था कि जीवनभर जिस इंसान के साथ उन्होंने हर सुख-दुख साझा किया, वह अब उनका साथ छोड़ चुका है। जब परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने उन्हें मांगा राम के निधन की जानकारी दी, तो वह इस सदमे को सहन नहीं कर सकीं। बताया जाता है कि करीब 15 मिनट बाद वह कमरे से बाहर निकलीं, उन्हें चक्कर आया और उनकी भी मौत हो गई।
दशकों का रिश्ता, अंतिम सफर भी एक साथ
मांगा राम और हरदेवी किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। दोनों ने मिलकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और जीवन का लंबा सफर तय किया। उनके परिवार में दो बेटे, बहुएं और पोते-पोतियां हैं।
रविवार शाम हुई दोनों की मौत के बाद सोमवार को गांव में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। पति-पत्नी की अर्थियां एक साथ उठीं और गिरि नदी के तट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्र के लोग शामिल हुए।
गांव में गम, हर आंख हुई नम
लगनू गांव में इस दंपती की एक साथ हुई विदाई की चर्चा हर किसी की जुबान पर है। जिन दो लोगों ने जीवनभर एक-दूसरे के साथ परिवार बसाया, जिम्मेदारियां निभाईं और समय के उतार-चढ़ाव देखे, उनकी अंतिम यात्रा भी एक साथ पूरी हुई।
यह घटना एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है और पूरे क्षेत्र के लिए भावुक कर देने वाला पल। हालांकि, हरदेवी की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसे केवल भावनात्मक सदमे से हुई मौत मानना उचित नहीं होगा।



