लखनऊ, संवाददाता https://dhadkannews.com : पीएम नरेंद्र मोदी ने गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक गति को नई दिशा देने वाला कॉरिडोर बनकर उभरा है।
गंगा एक्सप्रेसवे: सिर्फ सड़क नहीं, विकास की लाइफलाइन
594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब प्रदेश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे बन चुका है। करीब 36 हजार करोड़ रुपये की लागत से बना यह प्रोजेक्ट रिकॉर्ड 4 साल 4 महीने में तैयार हुआ। मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा से लेकर शाहजहांपुर, उन्नाव, रायबरेली और प्रयागराज तक 12 जिलों को जोड़ते हुए यह एक्सप्रेसवे पश्चिम और पूर्व यूपी के बीच दूरी को काफी कम कर देगा। इसकी खास बात यह है कि शाहजहांपुर के पास एयरस्ट्रिप भी बनाई गई है, जहां जरूरत पड़ने पर फाइटर जेट लैंड कर सकते हैं—यानी यह प्रोजेक्ट सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
यूपी: देश का एक्सप्रेसवे कैपिटल
आज उत्तर प्रदेश देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60% अपने पास रखता है। गंगा एक्सप्रेसवे के जुड़ने के बाद राज्य में 1900 किमी से ज्यादा का नेटवर्क तैयार हो चुका है। पहले से मौजूद प्रमुख एक्सप्रेसवे:
- यमुना एक्सप्रेसवे
- आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
ये सभी मिलकर यूपी को लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बना रहे हैं।
अभी रफ्तार बाकी है: 13 नए एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन
प्रदेश में विकास का पहिया यहीं नहीं रुक रहा। कई बड़े प्रोजेक्ट तेजी से बन रहे हैं:
- लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे: 63 किमी, सफर घटकर 35-40 मिनट
- गोरखपुर–शामली एक्सप्रेसवे: 700+ किमी, यूपी का सबसे लंबा प्रस्तावित कॉरिडोर
- गाजियाबाद–कानपुर एक्सप्रेसवे: 380 किमी, औद्योगिक विकास को बढ़ावा
- गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: पूर्वोत्तर से सीधा कनेक्शन
- वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेसवे: मल्टी-स्टेट कनेक्टिविटी, यात्रा समय आधा
इसके अलावा कई लिंक एक्सप्रेसवे—जैसे जेवर, चित्रकूट और फर्रुखाबाद—मौजूदा नेटवर्क को और मजबूत करेंगे।
क्या बदलेगा आम आदमी के लिए?
- यात्रा समय में भारी कमी
- नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और निवेश के अवसर
- पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक आसान पहुंच
- ग्रामीण इलाकों को सीधे मुख्यधारा से जोड़ने का मौका
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को “हाई-स्पीड मोड” में डालने की रणनीति है। आने वाले सालों में जब बाकी 13 एक्सप्रेसवे भी पूरे होंगे, तब यूपी न सिर्फ भारत बल्कि एशिया के सबसे मजबूत रोड नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो सकता है।



