संवाददाता, https://dhadkannews.com : वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देने का संकेत दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यूरिया और डीएपी के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी—यानी महंगाई का दबाव सीधे किसानों पर नहीं डाला जाएगा।
सरकार ने इस फैसले के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि खेती की लागत को नियंत्रण में रखना उसकी प्राथमिकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागत बढ़ने के बावजूद यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी 1,350 रुपये में ही उपलब्ध रहेगी। बढ़ी हुई लागत का अतिरिक्त बोझ सरकार खुद वहन करेगी।
💰 सब्सिडी का बड़ा दांव: 41 हजार करोड़ का सहारा
केंद्र ने खाद सब्सिडी को बनाए रखने के लिए 41,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड को मंजूरी दी है। यह कदम सिर्फ राहत नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की रणनीति भी माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि इनपुट लागत नियंत्रित रहती है, तो उत्पादन और बाजार दोनों संतुलित रहेंगे।
🆔 ‘फार्मर आईडी’: खाद वितरण का नया डिजिटल सिस्टम
अब खाद वितरण को पारदर्शी और जरूरत आधारित बनाने के लिए ‘फार्मर आईडी’ सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस व्यवस्था में किसान की जमीन, फसल और परिवार से जुड़ा डेटा एक यूनिक आईडी से लिंक होगा।इससे तय होगा कि किस किसान को कितनी खाद मिलनी चाहिए—न ज्यादा, न कम।
🚫 कालाबाजारी पर डिजिटल लगाम
सरकार ने माना है कि सब्सिडी वाला खाद कई बार गलत इस्तेमाल या जमाखोरी का शिकार होता है। नई व्यवस्था के जरिए इस गड़बड़ी पर रोक लगाने की तैयारी है। मकसद साफ है—असली किसानों तक खाद पहुंचे और अतिरिक्त उठाव या डायवर्जन पर सख्ती हो।
📊 9.29 करोड़ किसान जुड़े, लक्ष्य 13 करोड़
अब तक 9.29 करोड़ से ज्यादा ‘फार्मर आईडी’ बन चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य इसे देश के करीब 13 करोड़ किसानों तक पहुंचाना है, जिससे वितरण पूरी तरह डेटा आधारित हो सके।
🌱 किरायेदार किसानों के लिए भी रास्ता
नई नीति में बंटाईदार और किरायेदार किसानों को भी शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश और हरियाणा में इसका सफल परीक्षण हो चुका है, जहां जमीन मालिक की अनुमति के आधार पर ऐसे किसानों को खाद मिल रही है। अब इस मॉडल को देशभर में लागू करने की तैयारी है।
🌍 वैश्विक संकट पर नजर, किसान प्राथमिकता
पश्चिम एशिया सहित वैश्विक हालात का असर खाद आपूर्ति पर पड़ सकता है, लेकिन सरकार लगातार निगरानी में जुटी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उच्चस्तरीय बैठकों के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी संकट का असर किसानों तक न्यूनतम पहुंचे।
यह फैसला सिर्फ कीमतें स्थिर रखने का नहीं, बल्कि कृषि व्यवस्था को तकनीक और पारदर्शिता के साथ मजबूत करने का संकेत है। ‘फार्मर आईडी’ जैसे कदम जहां सिस्टम को स्मार्ट बनाएंगे, वहीं सब्सिडी का बड़ा पैकेज किसानों के भरोसे को भी मजबूत करेगा।



