कानपुर, संवाददाता https://dhadkannews.com : कानपुर का चर्चित किडनी कांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि देशभर में फैले एक संगठित ‘ह्यूमन ऑर्गन नेटवर्क’ की भयावह तस्वीर बनकर सामने आ रहा है। इस मामले में फरार चल रहे तीन अहम किरदार—डॉ. रोहित, डॉ. अफजल अहमद और ओटी मैनेजर अली—पर पुलिस ने शिकंजा कसते हुए ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया है।
पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर कार्रवाई तेज कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी भी चल रही है। अब तक इस केस में डॉक्टर दंपती समेत 9 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जबकि 12 अन्य की तलाश जारी है।
🔍 ‘ऑपरेशन’ के नाम पर करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया है कि यह रैकेट बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। गिरोह का मास्टरमाइंड डॉ. रोहित, जो दिल्ली-एनसीआर से जुड़ा है, ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया देता था। वहीं मेरठ के एक अस्पताल से जुड़े डॉ. अफजल अहमद की जिम्मेदारी ‘डोनर’ और ‘रिसीवर’ तलाशने की थी। ओटी मैनेजर अली ऑपरेशन को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाता था।
🌍 सीमाएं पार करता नेटवर्क
यह कोई लोकल गैंग नहीं, बल्कि एक इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल सिंडिकेट है। शुरुआती जांच में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक इसके कनेक्शन मिले हैं। पुलिस का अनुमान है कि अब तक 40 से 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं—जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
💸 50 हजार के झगड़े से खुला करोड़ों का राज
पूरे रैकेट का पर्दाफाश एक छोटे से पैसों के विवाद से हुआ। मेरठ में MBA कर रहे आयुष ने 10 लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने का सौदा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे ₹50 हजार कम दिए गए। इसी बात से नाराज होकर उसने पुलिस में शिकायत कर दी—और यहीं से करोड़ों के इस काले खेल का भंडाफोड़ हो गया।
📊 एक सौदे में 50 लाख का मुनाफा
जांच में खुलासा हुआ कि मुजफ्फरनगर की एक मरीज से किडनी के लिए ₹60 लाख वसूले गए, जबकि डोनर को सिर्फ ₹9.5 लाख मिले। यानी एक ही ऑपरेशन में गिरोह ने करीब ₹50 लाख का फायदा कमाया है।
पुलिस की तीन टीमें दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड में लगातार छापेमारी कर रही हैं। जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस केस ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और अवैध अंग व्यापार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



