- सरकार व नगर निगम के बड़े-बड़े वादे और दावे बहे पानी में
- बारिश ने गर्मी से दी राहत पर जलभराव से बढ़ीं मुश्किलें
- लोग बोले, ऐसी डबल इंजन सरकार से भगवान बचाए
ज्योति सिंह
नई दिल्ली/गुरुग्राम http://dhadkannews.com: बारिश से हो रहे जलभराव ने एनसीआर के लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। चंद घंटों की बारिश से ही देश की राजधानी दिल्ली व गुरुग्राम दरिया बन जाता है। यहां सड़कों पर चलना तो दूर घर से निकलना भी मुश्किल भरा है। डबल इंजन की सरकार व नगर निगमों के दावों की बारिश ने पोल खोल कर रख दी है। कालोनियों की गलियां उफान मारती नजर आईं तो वहीं सड़कें नदियों में तब्दील। चारों ओर बस पानी ही पानी। देश के प्रधान सेवक व उनके धुरंधर मुख्यमंत्रियों की बड़ी-बड़ी बातें और बड़े-बड़े दावे सब पानी के साथ ही बह गए। हालांकि आए दिन हो रही बारिश से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिल रही है पर जल भराव की समस्या ने लोगों की मुसीबतों को उससे कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है।
वर्ष बदले, सरकारें बदलीं, मेयर बदले पर देश की राजधानी और मिलेनियम सिटी गुरुग्राम न बदला। जलभराव और गंदगी की समस्या से लोगों का पहले भी जीना मुहाल था और अब भी। यहां चंद घंटों की बारिश से ही कालोनियों समेत सड़कें दरिया बन जाती हैं।आपको मालूम हो कि यह वही डबल इंजन की सरकार है जो पिछली केजरीवाल सरकार को जलभराव पर खूब हो हल्ला कर घेरते हुए नजर आती थी। सवाल बड़ा है अब इनका विकास का पहिया कहां रुक गया जिसने अब तक गति ही नहीं पकड़ी। इनके बड़ बोले नेताओं और मंत्रियों को तो मानों सांप ही सूंघ गया है जो कहीं अदृश्य हैं। सीजन की हर बारिश लोगों के लिए मुसीबत बन कर आ रही है। नौकरीपेशा व स्कूली बच्चों समेत सभी जलभराव के चलते घंटों फंसे नजर आ रहे हैं तो कईयों की गाड़ियां भी धोखा देती नजर आ रही हैं। ऐसा लगता है कि जैसे आस्था की पुजारी डबल इंजन सरकार ने मां गंगा व यमुना को यहां उतार दिया हो। आपको ज्ञातब्य हो कि बीते दिनों हुई तेज बारिश से जहां गाड़ियां पानी में तैरती हुई नजर आईं थीं तो वहीं कई दुर्घटनाएं भी सामने आयी थीं। बारिश ने सरकार समेत नगर निगम के दावों की पोल खोल कर रख दी है। बड़ी-बड़ी बातें और बड़े-बड़े दावे सब पानी के साथ ही बह गए। कालोनियों की गलियां उफान मार रही हैं और सड़कें नदियों में तब्दील हो चली हैं। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर मिलेनियम सिटी गुरुग्राम की कालोनियों समेत हर मार्ग का कमोवेश एक ही हाल है, मतलब जलमग्न। लोगों को घर से निकलना खतरे से खाली नजर नहीं आ रहा है। गुरुग्राम की बहुतायत एरिया में, गड्ढ़ों में सड़कें और उस पर वो भी जलमग्न लोगों को डरा रही हैं। हालांकि एनसीआर के लिए यह कोई नई बात नहीं है हर वर्ष ऐसी ही समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। कुछ दिनों का हो हल्ला और उस पर जिम्मेदारों का आश्वासन फिर सब टाँय-टॉय फिस्स।



