नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : दिल्ली का आस्था कुंज पार्क। शाम का वक्त। एक नाबालिग लड़की अपने दोस्त के साथ पार्क में पहुंचती है। दोनों एक बेंच पर बैठते हैं। कुछ ही देर बाद तीन युवक वहां पहुंचते हैं और खुद को पुलिसकर्मी बताते हैं।
इसके बाद जो घटनाक्रम लड़की ने पुलिस को बताया, उसने पूरे मामले को एक गंभीर आपराधिक जांच में बदल दिया। लड़की के बयान के मुताबिक, युवकों ने पहले उसके दोस्त को पकड़कर उसके साथ मारपीट की, फिर दोनों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद लड़की को पार्क के एक सुनसान हिस्से की ओर ले जाने का कथित प्रयास किया गया।
एक नाम… और डर का माहौल
पुलिस को दिए बयान में लड़की ने दावा किया कि जब उसने आरोपियों से वहीं बात करने और अपनी मां से संपर्क कराने की गुहार लगाई, तभी एक आरोपी ने दूसरे को “आसिफ भाई, गन निकाल” कहकर पुकारा।
लड़की के मुताबिक, इसके बाद उसे हथियार दिखाकर डराया गया और चाकू के जरिए धमकाते हुए सुनसान हिस्से में ले जाया गया। इसके बाद नाबालिग ने तीनों आरोपियों पर उसके साथ सामूहिक यौन हिंसा करने का आरोप लगाया है।
(नोट: नाबालिग की पहचान और घटना के संवेदनशील विवरणों को कानून और पत्रकारिता की मर्यादा के अनुसार उजागर नहीं किया जा रहा है।)
घटना के बाद फिर लौटाए मोबाइल
बयान के मुताबिक, कथित वारदात के बाद आरोपियों ने लड़की और उसके दोस्त को दोबारा साथ किया। उनके मोबाइल फोन वापस किए गए और दोनों को वहां से चले जाने के लिए कहा गया।
लड़की ने आरोप लगाया कि जाते समय उन्हें किसी को घटना के बारे में बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
लेकिन पार्क से बाहर निकलते ही कहानी बदल गई
पार्क से बाहर निकलने के बाद लड़की ने अपने दोस्त को पूरी घटना बताई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
यहीं से जांच शुरू हुई और पुलिस ने पीड़िता के बयान, घटनास्थल, CCTV तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कार्रवाई शुरू की।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच का फोकस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर भी है कि:
- तीनों आरोपी पार्क में क्यों पहुंचे थे?
- क्या उन्होंने पहले से दोनों पर नजर रखी थी?
- खुद को पुलिसकर्मी बताने का कथित मकसद क्या था?
- हथियार और धमकी के आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है?
- CCTV और तकनीकी जांच पीड़िता के बयान से कितना मेल खाती है?
एक बयान, कई सवाल और अब सबूतों की बारी
इस मामले में पीड़िता का बयान जांच की महत्वपूर्ण कड़ी है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से ही निकलेगा।
आस्था कुंज की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामले की जांच नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा, निगरानी और अपराधियों द्वारा पुलिस की पहचान का कथित दुरुपयोग जैसे सवाल भी सामने ला रही है।



