लखनऊ, संवाददाता https://dhadkannews.com : अखबार के वैवाहिक विज्ञापन से शुरू हुई पहचान… फिर शादी का भरोसा… और उसके बाद कथित तौर पर लाखों की ठगी। उत्तर प्रदेश के सीतापुर से सामने आई एक ऐसी कहानी ने लोगों को हैरान कर दिया है, जिसमें एक व्यक्ति पर एक-दो नहीं, बल्कि करीब 25 महिलाओं को शादी के नाम पर कथित तौर पर ठगने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित ठगी के जाल की आंच सीतापुर की सेवता विधानसभा सीट से भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी के परिवार तक पहुंची। विधायक ने खुद सोशल मीडिया लाइव के जरिए अपनी बेटी की शादी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बेटी की शादी कर अब बोले विधायक—‘हमारे साथ धोखा हुआ’
भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी ने हाल ही में फेसबुक लाइव में अपनी बेटी डॉ. प्रज्ञा तिवारी के साथ दिखाई देते हुए अपनी बात रखी। भावुक विधायक ने बताया कि उनकी बेटी की शादी वर्ष 2024 में मिश्रिख निवासी अनुज त्रिवेदी के बेटे प्रखर से हुई थी।
विधायक के मुताबिक शादी से पहले परिवार की अच्छी तरह जानकारी लेने की कोशिश की गई थी, लेकिन अब उन्हें महसूस हो रहा है कि उनके परिवार के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने अपनी बेटी से भी अनुज त्रिवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की बात कही। विधायक ने कहा कि महिलाओं के साथ धोखा करने और उनका सम्मान नहीं करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि अब उनका उस परिवार से कोई संबंध नहीं है।
‘यूपी का रावण’—पीड़ित महिलाओं के आरोप
मामले में सामने आई शिकायतों के अनुसार, अनुज त्रिवेदी पर अलग-अलग पहचान और नामों का इस्तेमाल कर महिलाओं से संपर्क करने और शादी के बाद कथित तौर पर पैसे तथा जेवर हासिल करने के आरोप हैं। पीड़ित महिलाओं ने उसे ‘यूपी का रावण’ तक कह दिया। आरोप है कि अनुज ने कई महिलाओं के सामने अलग-अलग पहचान पेश की। इतना ही नहीं, उसके बेटे प्रखर त्रिवेदी को भी कथित तौर पर ‘अविरल’ नाम से परिचित कराया जाता था।
वैवाहिक विज्ञापन बना कथित ठगी का हथियार
पुलिस के अनुसार, अनुज त्रिवेदी वैवाहिक विज्ञापनों को कथित तौर पर महिलाओं तक पहुंच बनाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करता था। आरोप है कि संपर्क बढ़ने के बाद शादी का भरोसा दिया जाता और विवाह के बाद महिलाओं से लाखों रुपये तथा जेवर लिए जाते।
पुलिस जांच में आरोपी द्वारा अजय अग्रवाल, अजय, संतोष सिंह, जयप्रकाश और रमेश चंद्र गुप्ता सहित कई नामों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
2022 में महाराष्ट्र से शुरू हुई शिकायतों की कड़ी
पुलिस के मुताबिक इस मामले की एक अहम कड़ी 4 मार्च 2022 को सामने आई, जब महाराष्ट्र के ठाणे जिले के नयानगर थाने में 75 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने अखबार में प्रकाशित वैवाहिक विज्ञापन के जरिए उनकी 45 वर्षीय बेटी से संपर्क किया था और बाद में उससे शादी कर कथित धोखाधड़ी की। इसके बाद अलग-अलग स्थानों से भी इसी तरह के आरोप सामने आने लगे।
24 मई को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तारी
महाराष्ट्र पुलिस ने अनुज त्रिवेदी को 24 मई को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय वह कथित तौर पर चंद्रप्रकाश त्रिवेदी के नाम से रह रहा था। आरोप है कि वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए करीब 25 महिलाओं को शादी का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।
गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद तीन पीड़ित महिलाएं सीतापुर के चंद्रावल गांव पहुंचीं। उन्होंने आरोपी की संपत्तियों की जानकारी जुटाने के बाद एडीएम आयुष चौधरी को ज्ञापन देकर कथित संपत्तियों को जब्त करने की मांग की।
सिक्योरिटी एजेंसी से रियल एस्टेट और फिर ‘शादी का खेल’?
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक अनुज त्रिवेदी ने लखनऊ में सिक्योरिटी गार्ड एजेंसी का काम किया। इसके बाद वह नोएडा चला गया और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा। आरोप है कि बाद में अनुज और उसका बेटा प्रखर ऑनलाइन वैवाहिक प्लेटफॉर्म और विज्ञापनों के जरिए महिलाओं से संपर्क करने लगे। इसके बाद अलग-अलग नामों और पहचानों के जरिए कथित तौर पर कई शादियां की गईं।
अब जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क
इस मामले ने सिर्फ एक आरोपी की कथित करतूतों पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि फर्जी पहचान, वैवाहिक विज्ञापन और ऑनलाइन मैट्रिमोनियल नेटवर्क के जरिए महिलाओं को ठगी से कैसे बचाया जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आरोपों के मुताबिक एक ही व्यक्ति इतने लंबे समय तक अलग-अलग पहचान बनाकर कई महिलाओं तक पहुंचता रहा, तो उसकी असली पहचान और गतिविधियों का पता पहले क्यों नहीं चल पाया? फिलहाल आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और आरोपों की जांच संबंधित पुलिस एजेंसियां कर रही हैं। अदालत में आरोप सिद्ध होने तक आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।
अब देखना यह है कि जांच की अगली कड़ी किन-किन नामों और संपत्तियों तक पहुंचती है—और क्या कथित ‘शादी के सौदागर’ के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी मौजूद है?



