आगरा, https://dhadkannews.com: प्रदेश के आगरा में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले माहौल गरमा गया है। जहां एक ओर सरकार 5,142 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी ग्रेटर आगरा परियोजना का शिलान्यास करने जा रही है, वहीं दूसरी ओर किसान अपने हक के लिए खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और स्थानीय किसानों ने साफ चेतावनी दी है—जब तक भूमि अधिग्रहण का पूरा मुआवजा ब्याज सहित नहीं मिलता, तब तक वे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर आगरा में उतरने नहीं देंगे।
🔴 पंचायत में बना आंदोलन का रोडमैप
एक दिन पहले आयोजित पंचायत में किसानों ने एकजुट होकर रणनीति बनाई। उनका कहना है कि इनर रिंग रोड और अन्य परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का अब तक पूरा भुगतान नहीं हुआ है।
किसानों की प्रमुख मांगें:
- अधिग्रहण की तारीख से 15% ब्याज सहित मुआवजा
- जिन किसानों के नाम खतौनी से हटाए गए हैं, उनका तत्काल सुधार
- लंबित मामलों का पारदर्शी और अंतिम निपटारा
🏗️ “पहले हिसाब, फिर विकास”
किसानों का रुख साफ है—वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन “अधूरा न्याय” स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन (कमिश्नर और जिलाधिकारी) उन्हें संतुष्ट नहीं करता, तब तक किसी भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत का विरोध जारी रहेगा। जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया ने दो टूक कहा कि “किसानों की जमीन ली जा चुकी है, लेकिन मुआवजा अधूरा है। पहले पूरा भुगतान हो, उसके बाद ही शिलान्यास हो।”
🚁 हेलीकॉप्टर रोकने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरने नहीं देंगे। इस बयान के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है।
📍 क्या है ग्रेटर आगरा परियोजना?
आगरा के रायपुर रहनकला क्षेत्र में बनने वाली इस परियोजना के तहत:
- 10 आधुनिक टाउनशिप विकसित होंगी
- अत्याधुनिक शहरी सुविधाएं दी जाएंगी
- कुल लागत करीब ₹5,142 करोड़
सरकार इसे आगरा के शहरी विस्तार और विकास के लिए बड़ा कदम मान रही है।
⚖️ टकराव या समाधान?
एक तरफ सरकार विकास का एजेंडा लेकर आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ किसान अपने अधिकारों के लिए अड़े हैं। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन किसानों को मना पाता है या आगरा में आज टकराव की स्थिति बनती है।



