Wednesday, March 4, 2026
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42 नाम, बड़ा संकेत! असम में गोगोई बनाम सरमा

असम 'विधानसभा चुनाव'

दिसपुर (असम): असम की 126 सीटों पर होने वाले 2026 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। Indian National Congress ने 42 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर साफ संकेत दे दिया है कि मुकाबला व्क्त्व और प्रदर्शन—दोनों पर होगा।

गोगोई की एंट्री: सीधे जोरहाट से

कांग्रेस सांसद और प्रदेश अध्यक्ष Gaurav Gogoi को जोरहाट से मैदान में उतारना महज़ टिकट वितरण नहीं, बल्कि नेतृत्व का सार्वजनिक ऐलान है। संसद में उपनेता विपक्ष रह चुके गोगोई ने 2023 के अविश्वास प्रस्ताव के बाद राष्ट्रीय स्तर पर जो प्रोफाइल बनाई, अब वही ऊर्जा राज्य की राजनीति में ट्रांसफर करने की कोशिश दिखती है।

पुराने चेहरे, नए संदेश

  • नेता विपक्ष Debabrata Saikia को नज़ीरा से टिकट।
  • पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Ripun Bora बारचल्ला से चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस ने अनुभवी चेहरों को फ्रंटलाइन में रखकर संगठनात्मक स्थिरता का संदेश दिया है—यह संकेत भी कि पार्टी “चेहरे बनाम चेहरा” की लड़ाई से पीछे नहीं हटेगी।

वंश और वारिस: दो सांसदों के बेटों को मौका

पहली सूची में दो सांसदों के बेटों को टिकट देकर पार्टी ने ‘युवा विस्तार’ का तर्क पेश किया है—

  • Rakibul Hussain के बेटे तंजील हुसैन को सामागुड़ी।
  • Pradyut Bordoloi के बेटे प्रतीक बारदोलोई को मार्घेरिटा।

यह फैसला जहां संगठन के भीतर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की कोशिश है, वहीं विपक्ष इसे वंशवाद का मुद्दा बना सकता है।

भाजपा की खामोशी और सरमा फैक्टर

पहली सूची में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की सीट का जिक्र नहीं है—यह रणनीतिक चुप्पी भी हो सकती है। फिलहाल असम में Bharatiya Janata Party की सरकार है और सरमा लगातार दूसरे कार्यकाल में कमान संभाल रहे हैं।

कांग्रेस की शुरुआती सूची से साफ है कि पार्टी 2021 की तरह बिखरे संदेश के बजाय इस बार स्पष्ट नेतृत्व और टार्गेटेड सीटों पर फोकस चाहती है। याद रहे, 2021 में तीन चरणों में मतदान हुआ था और नतीजे 2 मई को आए थे—तब भाजपा गठबंधन ने बढ़त कायम रखी थी।

चुनावी कैलेंडर और असली परीक्षा

सूत्रों के मुताबिक मार्च–अप्रैल में चुनाव संभव हैं, तारीखों की घोषणा जल्द हो सकती है। असली परीक्षा होगी—क्या गोगोई का आक्रामक संसदीय तेवर ज़मीनी वोट में बदल पाएगा?

तस्वीर साफ है कि 2026 में असम की लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि दो राजनीतिक शैलियों की होगी—एक तरफ संगठन और चेहरे का संतुलन साधती कांग्रेस, दूसरी ओर सशक्त मुख्यमंत्री का ब्रांड। अब निगाहें अगली सूची और भाजपा की पलटवार रणनीति पर हैं।

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