- इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर जोर
- टैक्स स्लैब जस के तस, निवेश बढ़ा
- भरोसा बरकरार, बेचैनी कायम
- काग़ज़ पर विकास, ज़मीन पर सवाल
ज्योति सिंह
नई दिल्ली, संवाददाता https://dhadkannews.com : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संसद में वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। बजट में सरकार ने तात्कालिक राहत के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी है। आयकर स्लैब में बड़े बदलाव न होने से मध्यम वर्ग की उम्मीदों को झटका लगा है, जबकि सरकार का दावा है कि यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय में मजबूत करेगा।
🔴 इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च
सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और शहरी विकास पर अब तक का सबसे बड़ा पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि “आज का निवेश कल की नौकरियों की गारंटी बनेगा।”
🔴 आयकर स्लैब में बड़ा बदलाव नहीं
आयकर ढांचा लगभग पहले जैसा है। टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत का इंतजार था लेकिन इनका इंतजार, इंतजार ही रहा गया। सरकार ने संकेत दिए कि लॉन्ग टर्म टैक्स सुधार पर काम जारी है। इससे शहरी मध्यम वर्ग में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
🔴 गरीब और ग्रामीण योजनाएं जारी
मुफ्त अनाज योजना जारी रखी गई है। ग्रामीण रोजगार और बुनियादी सेवाओं पर फोकस है और सरकार का यह भी दावा है कि “सहायता नहीं, आत्मनिर्भरता उनका लक्ष्य” है।
🔴 युवाओं के लिए वादे, नतीजे बाद में
स्किल डेवलपमेंट पर काम जारी है। स्टार्टअप और टेक सेक्टर को समर्थन देते हुए रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है। हालांकि युवाओं का कहना है कि ये सब तो ठीक है लेकिन—“नौकरी कब मिलेगी?”
🔴 महंगाई पर सीधी राहत नहीं
रसोई गैस, खाद्य पदार्थों पर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है जिस पर लोगों को सरकार से उम्मीद थी, जिससे महिलाओं और गृहिणियों की चिंता बरकरार है। सरकार का इस पर तर्क है कि सप्लाई बढ़ेगी तो कीमतें काबू में आएंगी।
🔴 राजनीतिक संदेश भी साफ
बजट 2026 में फ्रीबी कल्चर से दूरी बनाई गई है वहीं विकास और निवेश की राजनीति पर जोर दिया गया है।सरकार ने साफ संकेत दिया कि लोकप्रिय फैसलों से ज्यादा आर्थिक स्थिरता जरूरी है।
🔴 बजट-2026 पर आम आदमी बोले..
- नौकरीपेशा: “उम्मीद थी, राहत नहीं मिली”
- दुकानदार: “बड़े प्रोजेक्ट अच्छे हैं, ग्राहक चाहिए”
- किसान: “सहायता है, रोजगार चाहिए”
🔴 धैर्य की मांग करता बजट
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 तुरंत फायदा देने वाला नहीं है, लेकिन इसका असर दीर्घकालिक होगा।
यह बजट ‘कम राहत’ और ‘ज्यादा रोडमैप ‘पर केंद्रित नजर आ रहा है। आज असर सीमित है पर कल पर भरोसा जताया गया है, लेकिन आम आदमी के लिए इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है और महंगाई कमर तोड़ रही है। ज़मीनी सच्चाई यह है कि इस बजट से लोगों में भरोसा और बेचैनी दोनों साथ-साथ नजर आ रहे हैं। लोग सरकार की मंशा पर शक नहीं कर रहे हैं लेकिन इंतजार से थकने जरूर लगे हैं। आम आदमी को यह बजट खराब नहीं, लेकिन अधूरा जरूर लग रहा है।



