स्पोर्ट्स डेस्क, https://dhadkannews.com : भारतीय महिला क्रिकेट में मंगलवार को सिर्फ कप्तान नहीं बदली… एक पूरे दौर का अंत और नए दौर की शुरुआत हो गई। करीब एक दशक तक टीम की कमान संभालने वाली हरमनप्रीत कौर ने तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी है। इसके कुछ ही समय बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अनुभवी बल्लेबाज स्मृति मंधाना को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का नया फुल-टाइम व्हाइट-बॉल कप्तान नियुक्त कर दिया।
यानी अब भारतीय महिला क्रिकेट की कमान उस खिलाड़ी के हाथों में है, जो 2013 से टीम का हिस्सा है और जिसने मैदान पर बल्लेबाज के साथ-साथ एक सफल लीडर के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है।
एक कप्तानी खत्म… दूसरी कहानी शुरू
हरमनप्रीत कौर ने लंबे समय तक भारतीय महिला क्रिकेट को एक नई पहचान देने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में टीम ने कई बड़े मुकाबले खेले और हाल के समय में महिला एशिया कप तथा एशियाई खेलों में गोल्ड जैसी उपलब्धियां भी हासिल कीं।
इसके बावजूद कप्तानी को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही थी। इस साल महिला टी20 विश्व कप में भारत के नॉकआउट चरण में जगह नहीं बना पाने के बाद हरमनप्रीत की कप्तानी पर सवाल और तेज हुए थे।हालांकि इसके बाद टीम ने शानदार वापसी की और लगातार दो बड़े खिताब अपने नाम किए। लेकिन माना जा रहा है कि BCCI नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपना मन बना चुका था।
गुवाहाटी की बैठक के बाद आया बड़ा फैसला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को गुवाहाटी में BCCI की समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में सचिव देवजीत सैकिया के साथ हरमनप्रीत कौर, उप-कप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि बैठक का एक बड़ा मुद्दा हरमनप्रीत के कप्तानी भविष्य को लेकर था। रिपोर्ट के अनुसार, हरमनप्रीत के सामने विकल्प रखा गया था कि वह कम से कम किसी एक फॉर्मेट, विशेष रूप से वनडे टीम की कप्तानी जारी रख सकती हैं। महिला क्रिकेट में टेस्ट मैचों की संख्या सीमित होने के कारण वनडे कप्तानी उनके पास रखने का विकल्प भी मौजूद था। लेकिन हरमनप्रीत ने कथित तौर पर यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इसके कुछ ही घंटे बाद उन्होंने तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया। यहीं से भारतीय महिला क्रिकेट में एक नए अध्याय की शुरुआत तय हो गई।
अब स्मृति के हाथों में टीम की कमान
BCCI ने इसके बाद स्मृति मंधाना को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का फुल-टाइम व्हाइट-बॉल कप्तान बनाने की घोषणा की।
स्मृति के लिए यह भूमिका अचानक नहीं है। वह पहले भी भारत की कप्तानी कर चुकी हैं—18 टी20 इंटरनेशनल और 4 वनडे मुकाबलों में टीम की कमान संभाल चुकी हैं। लेकिन अब जिम्मेदारी अलग है। अब वह सिर्फ अंतरिम या परिस्थितिजन्य कप्तान नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के नए दौर की स्थायी व्हाइट-बॉल लीडर होंगी।
RCB की कप्तानी ने दिखाया था दम
स्मृति की कप्तानी का सबसे बड़ा प्रमाण हाल के वर्षों में विमेंस प्रीमियर लीग में देखने को मिला। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 2024 और 2026 में WPL खिताब दिलाकर अपनी लीडरशिप क्षमता साबित की। यही वजह है कि BCCI ने भी स्मृति के अनुभव और नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताया है।
BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने स्मृति को बधाई देते हुए कहा कि वह कई वर्षों से भारतीय क्रिकेट का अहम हिस्सा रही हैं और उन्होंने हमेशा आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व करने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने भरोसा जताया कि स्मृति अपनी नई जिम्मेदारी को उसी प्रतिबद्धता और प्रोफेशनलिज्म के साथ निभाएंगी, जैसा उन्होंने पूरे करियर में दिखाया है।
BCCI के ऑनरेरी सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने भी स्मृति की नेतृत्व क्षमता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत को लीड करना बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन स्मृति के पास इस भूमिका को संभालने का अनुभव और स्वभाव दोनों हैं।
स्मृति ने सबसे पहले हरमनप्रीत को याद किया
कप्तानी संभालने के बाद स्मृति के बयान का सबसे भावुक हिस्सा हरमनप्रीत कौर को लेकर था।
उन्होंने कहा कि वह हरमनप्रीत और कप्तान के रूप में उनके योगदान को याद करना चाहेंगी। उनके मुताबिक हरमनप्रीत ने पूरी लगन के साथ टीम की कप्तानी की और भारतीय महिला क्रिकेट की यात्रा का एक अहम हिस्सा रहीं। यह बयान साफ संकेत देता है कि कप्तानी बदली है, लेकिन टीम के भीतर सम्मान और विरासत की कड़ी बरकरार रहेगी।
‘सिर्फ कप्तान नहीं, नए दौर की लीडर’
स्मृति ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर कहा कि भारत की कप्तानी करना उनके लिए बेहद खास सम्मान है। उन्होंने BCCI, चयनकर्ताओं, टीम साथियों और अपने सफर में साथ देने वाले सभी लोगों का आभार जताया।
साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि वह टीम के साथ काम करने, साथ-साथ सीखने और भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती हैं। यानी स्मृति की कप्तानी का संदेश सिर्फ इतना नहीं है कि “अब कप्तान मैं हूं।” बल्कि संदेश यह है कि “अब टीम को मिलकर एक नए दौर में ले जाना है।”
हरमनप्रीत की विरासत, स्मृति की चुनौती
हरमनप्रीत कौर के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय महिला क्रिकेट को बड़े मंचों पर लगातार प्रतिस्पर्धी बनाना थी। अब वही चुनौती स्मृति मंधाना के सामने होगी।
एक तरफ उनके पास वर्षों का इंटरनेशनल अनुभव है, दूसरी तरफ RCB के साथ WPL की सफल कप्तानी का आत्मविश्वास। लेकिन भारतीय टीम की कप्तानी और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की कप्तानी में बड़ा अंतर है।
स्मृति के सामने अब सबसे बड़ी परीक्षा होगी—टीम को बड़े ICC टूर्नामेंट्स में निर्णायक मुकाबलों तक ले जाना और वहां दबाव में जीत दिलाना।
अब महिला क्रिकेट की तस्वीर बदल चुकी है
हरमनप्रीत कौर का लंबा कप्तानी दौर खत्म हो गया। स्मृति मंधाना को नई जिम्मेदारी मिल गई और भारतीय महिला क्रिकेट अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां पुराने दौर की विरासत और नए दौर की महत्वाकांक्षा आमने-सामने हैं।
कप्तानी की कुर्सी बदली है, लेकिन असली सवाल अब शुरू होता है—क्या स्मृति मंधाना भारतीय महिला क्रिकेट को उस मुकाम तक पहुंचा पाएंगी, जिसका सपना हरमनप्रीत के दौर में देखा गया था? एक युग खत्म हुआ है… अब बारी है स्मृति युग की।



