लखनऊ/मथुरा https://dhadkannews.com : वृंदावन के ‘हित राधा केली कुंज’ आश्रम को लेकर चल रहा विवाद अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक तरफ शिष्य रसिक दुलारी की रहस्यमयी मौत की गुत्थी है, तो दूसरी तरफ आश्रम के नाम पर कथित आर्थिक और प्रभावशाली नेटवर्क के आरोप सामने आ रहे हैं। इसी बीच संतों की ओर से किया गया ₹5 करोड़ से जुड़ा एक दावा चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दावे में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के जनवरी 2023 में वृंदावन पहुंचने का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, ₹5 करोड़ के भुगतान या विराट-अनुष्का को आश्रम लाने से जुड़े इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या विराट की पहली यात्रा के पीछे था ₹5 करोड़ का दावा?
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा 4 जनवरी 2023 को वृंदावन पहुंचे थे और उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था। इसके बाद दोनों कई मौकों पर महाराज के दर्शन करते नजर आए।
अब श्री कृष्णा न्यास संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने इसी पहली मुलाकात को लेकर एक बेहद गंभीर दावा किया है। उनके मुताबिक, एक कथित बिल्डर लॉबी और भू-माफिया सिंडिकेट ने प्रेमानंद महाराज के नाम और लोकप्रियता का इस्तेमाल अपने प्रभाव और आर्थिक हितों के लिए किया। दावे में यहां तक कहा गया है कि विराट कोहली को पहली बार आश्रम लाने के लिए ₹5 करोड़ की कथित रकम खर्च की गई थी।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं से उठता है—अगर ऐसा कोई आर्थिक लेन-देन हुआ था, तो उसका लाभ किसे मिला और रकम की कथित वसूली किस तरीके से की जा रही थी? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच का विषय हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस दावे को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री योगी को पत्र, मांगी गई Z+ सुरक्षा
₹5 करोड़ वाले दावे के सामने आने के बाद दिनेश शर्मा फलाहारी और महामंडलेश्वर श्री राधा नन्द गिरी की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है।
पत्र में कथित बिल्डर लॉबी और भू-माफिया के प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है। संतों ने प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका व्यक्त करते हुए उन्हें Z+ सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। यानी विवाद अब केवल आश्रम की आंतरिक घटनाओं तक सीमित नहीं रहा। इसमें कथित आर्थिक नेटवर्क, सुरक्षा और प्रभावशाली लोगों के नामों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
रसिक दुलारी की मौत ने खोली विवाद की सबसे डरावनी परत
पूरे मामले की सबसे संवेदनशील कड़ी आश्रम के शिष्य रसिक दुलारी की मौत है। 25 सितंबर को सामने आए CCTV फुटेज में रसिक दुलारी को छत से नीचे गिरते हुए देखा गया था। शुरुआती तौर पर घटना को आत्महत्या से जोड़कर देखा गया, लेकिन पोस्टमार्टम से सामने आई जानकारी ने मामले को और पेचीदा बना दिया।
रिपोर्ट से जुड़े दावों के मुताबिक, छत से गिरने से पहले रसिक ने कथित तौर पर ग्राइंडर मशीन का इस्तेमाल कर खुद को गंभीर रूप से घायल किया था। यह सवाल आज भी अनुत्तरित है कि आखिर ऐसा भयावह कदम उठाने के पीछे क्या वजह थी?
पुलिस इस मामले में अब तक बड़ी संख्या में लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांचकर्ताओं के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रसिक दुलारी की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों और मानसिक स्थिति की कड़ी को समझना है।
क्या आश्रम से लोग गायब भी हुए?
विवाद का दूसरा पहलू उन परिवारों के आरोप हैं, जो अपने परिजनों की तलाश में आश्रम तक पहुंचे।
रिपोर्टों के मुताबिक, मेरठ निवासी नेत्रपाल अपने बेटे प्रिंस की तस्वीर लेकर आश्रम के बाहर भटकते नजर आए। उनका दावा है कि प्रिंस 8 मई 2024 को दर्शन के लिए आया था, लेकिन इसके बाद घर वापस नहीं लौटा।
हालांकि, पुलिस द्वारा पहले लापता हुए एक युवक को बरसाना से बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे मामलों ने आश्रम से जुड़े लोगों और श्रद्धालुओं के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं—हालांकि किसी व्यक्ति के लापता होने को आश्रम की कथित गतिविधियों से सीधे जोड़ना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
सुरक्षा के बीच दूसरे स्थान पर पहुंचे प्रेमानंद महाराज?
विवाद और बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच प्रेमानंद महाराज के दूसरे स्थान पर चले जाने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एक अन्य गुप्त आश्रम में रखा गया है।
इस बीच वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे जरूरी है कि आरोप, दावे और जांच में सामने आए तथ्य—तीनों को अलग-अलग देखा जाए।
अब तीन सवालों पर टिकी है पूरी जांच
प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े इस पूरे विवाद में फिलहाल तीन सवाल सबसे अहम हैं—
- पहला—₹5 करोड़ का कथित लेन-देन क्या वास्तव में हुआ था?
- दूसरा—रसिक दुलारी की मौत के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी?
- तीसरा—लापता युवाओं से जुड़े आरोपों में क्या कोई संगठित नेटवर्क सामने आता है?
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आएंगे।
फिलहाल बिल्डर लॉबी, ₹5 करोड़ की कथित डील, रसिक दुलारी की मौत और लापता युवाओं के आरोप—इन सभी कड़ियों को लेकर कई दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।



