नई दिल्ली, https://dhadkannews.com : शाम का वक्त था। कठुआ के एक संवेदनशील पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात CISF कैंप में सब कुछ सामान्य चल रहा था। फिर अचानक गोलियों की आवाज ने पूरे कैंप को हिला दिया। कुछ ही पलों में ड्यूटी पर तैनात जवानों के बीच अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा घेरे के भीतर ही चार जवान जिंदगी की जंग हार गए।
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र के मशका इलाके में स्थित सेवा हाइडल पावर प्रोजेक्ट में मंगलवार शाम हुई फायरिंग की घटना में CISF के चार कर्मियों की मौत हो गई। मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट एवं कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और दो कांस्टेबल शामिल हैं।
बहस से शुरू हुआ मामला, गोलियों तक पहुंचा
शुरुआती जानकारी के मुताबिक घटना से पहले CISF कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद एक CISF हेड कांस्टेबल पर अपने साथियों पर सरकारी हथियार से फायरिंग करने का आरोप है।
घटना शाम करीब 6:40 बजे की बताई जा रही है। आरोपी जवान की पहचान अवधेश कुमार सिंह के रूप में सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, वह QRT ड्यूटी से जुड़ा था और कथित तौर पर कैंप परिसर में पहुंचने के बाद फायरिंग शुरू हुई।
150 राउंड की बात ने बढ़ाई चिंता
घटना से जुड़ी शुरुआती जानकारी में यह भी सामने आया है कि आरोपी के पास करीब 150 राउंड गोला-बारूद था। हालांकि, कितनी गोलियां चलाई गईं और फायरिंग की पूरी परिस्थितियां क्या थीं, इसकी आधिकारिक जांच अभी जारी है।
चारों घायल CISF कर्मियों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
पहाड़ों के बीच मौजूद है घटना का स्थल
सेवा पावर प्रोजेक्ट का यह इलाका भौगोलिक रूप से बेहद अलग स्थिति में है। रिपोर्टों के अनुसार, घटनास्थल कठुआ के बसोहली और हिमाचल प्रदेश के चंबा क्षेत्र के बीच स्थित है और वहां पहुंच का रास्ता भी चुनौतीपूर्ण है।
यही वजह रही कि घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर इलाके को सुरक्षित किया और जांच शुरू की।
आरोपी हिरासत में, अब सवाल ‘क्यों?’
घटना के बाद आरोपी CISF जवान को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। लेकिन इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सवाल अभी भी अनुत्तरित है—आखिर ऐसा क्या हुआ कि ड्यूटी पर तैनात जवान ने अपने ही साथियों पर हथियार तान दिया?
फिलहाल फायरिंग की सटीक वजह आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां घटना से पहले हुई बातचीत, कथित विवाद, हथियार के इस्तेमाल और फायरिंग के पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं।
सुरक्षा घेरे के भीतर हुई इस घटना ने छोड़े कई सवाल
CISF की जिम्मेदारी देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना है। ऐसे में उसी सुरक्षा व्यवस्था के भीतर हुई यह घटना कई स्तरों पर जांच का विषय बन गई है।
अभी जांच शुरुआती चरण में है। इसलिए घटना के कारण, फायरिंग का पूरा क्रम और जिम्मेदारी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
चार परिवारों में पसरा मातम… और कठुआ के उस कैंप में अब भी गूंज रहा एक सवाल—आखिर उस शाम हुआ क्या था?



