लखनऊ/फिरोजाबाद, https://dhadkannews.com : एक मोबाइल फोन… कई सुरक्षा लॉक… और परिवार के लोगों को उससे दूर रखने की असाधारण सतर्कता। फिरोजाबाद के रजावली क्षेत्र में सामने आए एक गंभीर साइबर अपराध मामले ने परिवार के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया है।
पुलिस ने 29 वर्षीय पूजा माथुर को टेलीग्राम के जरिए बच्चों से संबंधित अवैध यौन शोषण सामग्री डाउनलोड करने, साझा करने और कथित तौर पर बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने मोबाइल फोन को लेकर इतनी सतर्क रहती थी कि वह अपने सगे भाइयों तक को फोन छूने नहीं देती थी।परिजनों का कहना है कि वे उसकी इस आदत को केवल निजी स्वभाव और फोन की प्राइवेसी समझते रहे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसी मोबाइल की जांच के बाद पुलिस के सामने गंभीर आरोपों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी आएगी।
मोबाइल के पास आते ही शुरू हो जाता था विवाद
जांच में परिवार के लोगों ने पुलिस को बताया कि पूजा अपने मोबाइल को लेकर बेहद सतर्क रहती थी। फोन पर कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण परिवार का कोई सदस्य आसानी से उसे इस्तेमाल नहीं कर सकता था।
बताया गया कि जब भी घर का कोई व्यक्ति उसके फोन के पास जाता या उसे देखने की कोशिश करता, वह नाराज हो जाती और विवाद करने लगती थी। धीरे-धीरे परिवार ने इसे उसकी निजी आदत मानकर नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद यही मोबाइल अब इस पूरे मामले की जांच का सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत बन गया है।
गिरफ्तारी की खबर मिलते ही थाने पहुंचे परिजन
गुरुवार को पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद आरोपी महिला के परिवार के सदस्य और भाई रजावली थाने पहुंचे।
पुलिस के अनुसार, जब परिजनों को मामले में लगे आरोपों और टेलीग्राम के जरिए कथित गतिविधियों की जानकारी मिली तो वे स्तब्ध रह गए। परिवार के लोगों ने कहा कि उन्हें पहले कभी इस तरह की किसी गतिविधि की जानकारी नहीं थी। मामले के सामने आने के बाद परिवार भी गहरे सदमे में बताया जा रहा है।
100 से 500 रुपये में लिंक देने का आरोप
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी टेलीग्राम के अलग-अलग ग्रुपों से जुड़ी हुई थी और कथित तौर पर अवैध सामग्री के लिंक उपलब्ध कराने के बदले 100 से 500 रुपये तक वसूलती थी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी के संपर्क में कितने लोग थे और कथित तौर पर यह सामग्री किन-किन लोगों तक पहुंचाई गई।
UPI और बैंक खातों की भी जांच
पुलिस के अनुसार, कथित लेन-देन के लिए डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था। अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आरोपी के UPI ट्रांजेक्शन और बैंक खातों की पड़ताल है।
अधिकारियों की कोशिश यह जानने की है कि कथित तौर पर इस गतिविधि से कितनी रकम प्राप्त हुई और पैसा किन खातों में भेजा गया।
छह महीने से गतिविधियों में शामिल होने की जांच
पुलिस पूछताछ में आरोपी के करीब छह महीने से इस कथित गतिविधि से जुड़े होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
महिला पति से अलग होकर मायके में रह रही थी। पुलिस अब उसके मोबाइल डेटा, बैंक रिकॉर्ड और टेलीग्राम से जुड़े डिजिटल संपर्कों की गहन जांच कर रही है।
अब फोरेंसिक जांच खोलेगी पूरे नेटवर्क का राज
पुलिस के लिए अब सबसे अहम सबूत आरोपी का मोबाइल फोन है। डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सामग्री कहां से प्राप्त की गई, किन अकाउंट्स और ग्रुपों से संपर्क था और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि आरोपी के कथित ग्राहकों और संपर्कों का नेटवर्क कितना बड़ा था।
सबसे बड़ा सवाल—क्या यह सिर्फ एक आरोपी का मामला है या पीछे है बड़ा डिजिटल नेटवर्क?
एक मोबाइल को लेकर असाधारण गोपनीयता, कई सुरक्षा लॉक, टेलीग्राम ग्रुप, डिजिटल लिंक और UPI ट्रांजेक्शन—इन सभी पहलुओं को जोड़कर पुलिस अब मामले की पूरी कड़ी तलाश रही है। फोरेंसिक रिपोर्ट और बैंकिंग जांच के बाद इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और पुलिस पूरे डिजिटल नेटवर्क की जांच कर रही है।



