स्पोर्ट्स डेस्क, https://dhadkannews.com : गोल के बाद भारत ने सिर्फ मैच नहीं खेला… पूरे 60 मिनट इतिहास की रक्षा की।
जापान के आईची-नागोया में शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसका इंतजार देश को 44 साल से था। फाइनल में भारतीय टीम ने मौजूदा एशियाई चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर एशियन गेम्स में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
भारत के लिए यह सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं था। यह 1982 के बाद महिला हॉकी में एशियाई खेलों का दूसरा स्वर्ण है। 1998 और 2018 में फाइनल तक पहुंचकर रजत पदक से संतोष करने वाली टीम ने इस बार आखिरी कदम भी पार कर लिया।
10वें मिनट में लालरेम्सियामी ने खोल दिया गोल्ड का रास्ता
फाइनल की शुरुआत में चीन ने भारतीय सर्कल में दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन 10वें मिनट में मैच का रुख अचानक बदल गया।
साक्षी के शानदार पास पर लालरेम्सियामी ने रिवर्स हिट लगाई और गेंद को चीनी गोल के ऊपरी हिस्से में पहुंचा दिया।
स्कोर: भारत 1-0 चीन
यही गोल आखिर तक निर्णायक साबित हुआ। खास बात यह रही कि लालरेम्सियामी ने यह ऐतिहासिक गोल अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में किया।
चीन ने दबाव बढ़ाया, सविता बनीं भारत की दीवार
गोल के बाद मुकाबला भारत के लिए आसान नहीं हुआ। चीन ने लगातार हमले किए और बराबरी की कोशिश में भारतीय डिफेंस को पीछे धकेल दिया।
दूसरे क्वार्टर में चीन को पेनल्टी स्ट्रोक तक मिल गया। भारत की बढ़त खतरे में थी और सामने थी बराबरी की सीधी संभावना।
लेकिन गोलपोस्ट के सामने खड़ी सविता पूनिया ने शानदार बचाव करते हुए चीन की कोशिश नाकाम कर दी।
इसके बाद भारतीय डिफेंस ने हर हमले का जवाब दिया। चीन ने बार-बार सर्कल में प्रवेश किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने ब्लॉक, टैकल और क्लियरेंस के जरिए बढ़त को कायम रखा।
आखिरी 15 मिनट में थम गईं सांसें
तीसरे क्वार्टर में भी भारत ने अपनी बढ़त बचाए रखी। चौथे क्वार्टर में चीन ने गोलकीपर तक हटाकर अतिरिक्त आउटफील्ड खिलाड़ी के साथ हमला तेज किया।
लेकिन भारतीय डिफेंस ने आखिरी सीटी तक चीन को गोल करने का मौका नहीं दिया।
सीटी बजी… स्कोर 1-0 रहा… और 44 साल का इंतजार खत्म हो गया।
Hockey India के आधिकारिक मैच रिकॉर्ड में भी फाइनल का परिणाम चीन 0-1 भारत दर्ज है।
1982 के बाद फिर वही सुनहरा रंग
महिला हॉकी को एशियन गेम्स में पहली बार 1982 में शामिल किया गया था और उसी साल दिल्ली में भारत ने स्वर्ण जीता था।
इसके बाद भारत 1998 और 2018 में फाइनल तक पहुंचा, लेकिन दोनों बार उसे रजत पदक मिला। 2026 में चीन को हराकर भारत ने आखिरकार दोबारा एशिया की चैंपियन टीम का खिताब हासिल कर लिया।
गोल्ड के साथ मिला ओलंपिक का टिकट
इस जीत की अहमियत सिर्फ एशियन गेम्स तक सीमित नहीं है। स्वर्ण पदक जीतने के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया है।
यानी नागोया में जीता गया यह गोल्ड मेडल भारत के लिए सिर्फ इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि अगले बड़े ओलंपिक सफर की शुरुआत भी है। एक तरफ लालरेम्सियामी का गोल… दूसरी तरफ सविता की बचत… और बीच में पूरी टीम की चट्टान जैसी डिफेंस।
44 साल बाद भारतीय महिला हॉकी ने फिर साबित कर दिया—सोना सिर्फ जीता नहीं जाता, उसके लिए आखिरी सेकंड तक लड़ना पड़ता है।



