Wednesday, October 14, 2026
spot_img
Homeराज्यउत्तर प्रदेशयूपी की सियासत में BJP का बड़ा दांव! राज्यसभा की 10 सीटों...

यूपी की सियासत में BJP का बड़ा दांव! राज्यसभा की 10 सीटों पर निर्विरोध जीत, अखिलेश के खाते में भी 2 सीटें

लखनऊ, https://dhadkannews.com : उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर सियासी समीकरणों की तस्वीर साफ कर दी है। 10 सीटें, 10 उम्मीदवार और मुकाबला शून्य! भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आठ सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) ने दो सीटें अपने नाम कीं। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नामांकन वापसी की समय-सीमा समाप्त होते ही सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी गई।

इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी की रणनीति की हो रही है। पार्टी ने अपने आठों उम्मीदवारों के लिए नए चेहरों पर भरोसा जताया है। वहीं, सपा ने अपने वरिष्ठ नेता प्रो. राम गोपाल यादव के साथ उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को राज्यसभा भेजने का रास्ता साफ कर लिया।

10 सीटों का हिसाब साफ, किस पार्टी को कितनी सीटें?

राज्यसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने आठ सीटें हासिल कीं, जबकि समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिलीं। दोनों दलों के उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने से अब 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की जरूरत नहीं रह गई।

बीजेपी के निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवार:

  • धर्मपाल सिंह
  • राधाकांत ओझा
  • प्रकाश पाल
  • विद्यासागर सोनकर
  • गोपी कृष्ण पांडेय
  • प्रियंका सिंह रावत
  • राम प्रताप सिंह चौहान
  • श्रुति गंगवार

समाजवादी पार्टी के निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवार:

  • प्रो. राम गोपाल यादव
  • धनराज परिमल नाथवानी

इन परिणामों के साथ उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की सभी 10 सीटों पर निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 9 अक्टूबर को सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की आधिकारिक घोषणा की गई।

बीजेपी ने पुराने चेहरों की जगह नए नामों पर क्यों लगाया दांव?

इस चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार चयन रणनीति खास रही। पार्टी ने अपने आठों मौजूदा सदस्यों को दोबारा मौका देने के बजाय नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को भी इस बार दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया।

बीजेपी के आठ उम्मीदवारों में दो महिलाएं शामिल हैं। साथ ही, उम्मीदवारों के चयन में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दलित, ब्राह्मण और ठाकुर समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह फैसला केवल राज्यसभा की सीटें भरने तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में भी इसे देखा जा सकता है।

सपा ने दो सीटें बचाईं, अखिलेश की रणनीति पर नजर

समाजवादी पार्टी के लिए भी यह परिणाम अहम है। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. राम गोपाल यादव का राज्यसभा पहुंचना और धनराज परिमल नाथवानी का निर्विरोध चुना जाना सपा के संसदीय प्रतिनिधित्व को मजबूती देता है।

सपा ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे दसवीं सीट पर संभावित मुकाबले की स्थिति नहीं बनी। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया बिना मतदान के पूरी हो गई। अब राजनीतिक निगाहें राज्यसभा के इस परिणाम से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर टिकेंगी।

दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज, मतदान की नौबत ही नहीं आई

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्र जांच के बाद निरस्त कर दिए गए थे। इसके बाद मैदान में बीजेपी और सपा के कुल 10 उम्मीदवार ही रह गए।

9 अक्टूबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने के साथ ही सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसी वजह से इन सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

अब आगे क्या?

राज्यसभा चुनाव का परिणाम भले ही निर्विरोध रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने दूर तक जा सकते हैं। बीजेपी के लिए यह अपने संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधने का अवसर है, जबकि सपा के लिए अपने संसदीय प्रतिनिधित्व को बनाए रखने का।

अब देखना होगा कि राज्यसभा में नए चेहरों की यह एंट्री उत्तर प्रदेश की राजनीति में किस तरह की भूमिका निभाती है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल अपनी रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
DGS SOLAR

Most Popular

Recent Comments